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Explainer: घर की जमापूंजी खत्म, पेपर लीक से टूटे सपने; नौकरियां न मिलने और महंगाई से देश का युवा तनाव का शिकार

GenZ Mental Health: देश का युवा वर्ग इस समय चौतरफा संकट से जूझ रहा है। एक तरफ भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की महामारी और बेरोजगारी की मार है, तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई के बीच युवा मानसिक तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं।

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May 22, 2026
नीट पेपर लीक(फोटो-IANS)

Youth-Frustration: भटकते फिर रहे हैं कारवां मंजिल नहीं मिलती, जहां वालों को राहे-रहबरे-कामिल नहीं मिलती। आजकल देश के हालात कुछ ऐसे ही हैं। आज का युवा दिशाहीन हो चुका है और वह भटक रहा है।जिस नौजवान पीढ़ी से देश के भविष्य को संवारने की उम्मीद थी, वह इस समय एक बेहद कठिन दौर से गुजर रही है। रोजगार के सिमटते अवसर और सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में लगातार होते लीक के मामलों ने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है। बरसों तक कमरे में बंद रह कर तैयारी करने वाले छात्रों के हाथ जब सिर्फ परीक्षा रद्द होने का नोटिस आता है, तो उनका हौसला टूट जाता है। इन हालात ने देश के एक बड़े युवा वर्ग को मानसिक तनाव और हताशा के दलदल में धकेल दिया है। एक अहम तथ्य यह है कि देश के युवाओं में बढ़ते असंतोष के कारण ही कॉकरोच जनता पार्टी बनी है, जो आज के युवाओं के गुस्से का एक जीता जागता उदाहरण है।

उम्मीदों पर पानी फेरती व्यवस्था और बढ़ती महंगाई

दरअसल एक आम युवा के लिए प्रतियोगिता परीक्षा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार के आर्थिक उत्थान का जरिया होती है। लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह एक के बाद एक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, उसने पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके साथ ही, बाजार में बढ़ती महंगाई ने उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। कोचिंग की फीस, रहने-खाने का खर्च और किताबों की बढ़ती कीमतों के बीच बिना किसी गारंटी के तैयारी करते रहना अब युवाओं के लिए आर्थिक और मानसिक रूप से बहुत मुश्किल होता जा रहा है।

युवाओं की लाचारी से अब पूरे परिवार में फैल रहा है डिप्रेशन

रोजगार का यह अकाल अब सिर्फ युवाओं के कमरे या परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी वजह से पूरे के पूरे परिवार मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। 'सोशल साइंस एंड मेडिसिन' जर्नल की एक नई रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि घर में पढ़े-लिखे बच्चे के बेरोजगार बैठने का सीधा असर माता-पिता की मानसिक सेहत पर पड़ता है, जिससे उनमें डिप्रेशन का खतरा 12 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। भारत जैसे देश में, जहां मां-बाप अपनी पूरी जिंदगी की कमाई बच्चों की कोचिंग और पढ़ाई में झोंक देते हैं, वहां पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द होना पूरे घर के सपनों को तोड़ देता है। हालत यह है कि देश का लगभग 25 फीसदी युवा इस समय 'NEET' (ना पढ़ाई, ना नौकरी, ना कोई ट्रेनिंग) के चक्रव्यूह में फंसा है, और यही खालीपन पूरी पीढ़ी को तनाव का शिकार बना रहा है।

डिप्रेशन का शिकार हो रही है नई पीढ़ी

मनोवैज्ञानिक डॉ. रवि गुंठे के अनुसार, अनिश्चित भविष्य और लगातार मिल रही असफलताओं के कारण युवाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले तेजी से बढ़े हैं। समाज और परिवार की उम्मीदों का बोझ, और उस पर व्यवस्था की नाकामी, युवाओं को अंदर से खोखला कर रही है। जब मेहनत करने के बाद भी योग्यता के बजाय भ्रष्टाचार हावी होने लगता है, तो युवाओं का सिस्टम पर से विश्वास उठ जाता है। यही भटकाव और अकेलापन उन्हें मानसिक रोगों की ओर ले जा रहा है।




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