इस मामले की जांच सीबीआई द्वारा विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों पर दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। एजेंसी का दावा है कि अब तक की जांच में आरएचएफएल और आरसीएफएल द्वारा जुटाए गए 15,548 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के नियंत्रण वाली शेल और समूह कंपनियों के नेटवर्क के ज़रिए कथित तौर पर दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। जांच के दौरान ईडी ने 80 से ज़्यादा परिसरों पर तलाशी भी ली है।