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अनिल अंबानी ग्रुप को एक और झटका, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 1,021 करोड़ की संपत्तियाँ की कुर्क

ED Action Against Anil Ambani Group: ईडी ने अनिल अंबानी ग्रुप को एक और झटका दे दिया है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 12, 2026

Anil Ambani

अनिल अंबानी (File Photo)

अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के मामले में अनिल के खिलाफ ईडी (ED - Enforcement Directorate) की जांच चल रही है और उनसे कई बार पूछताछ भी की जा चुकी है। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने अब तक अनिल की हज़ारों करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। अब हाल ही में ईडी ने उन्हें एक और बड़ा झटका दे दिया है। ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) से संबंधित 1,021 करोड़ रूपए की अतिरिक्त संपत्तियाँ कुर्क की हैं।

तेज़ी से चल रही है जांच

कुर्क संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पास मौजूद रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर, सासन पावर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड से प्राप्त होने वाली कुछ ऋण राशि शामिल है। ईडी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में गठित एसआईटी इस मामले की जांच तेज़ी से कर रही है।

अब तक कितनी संपत्ति हुई कुर्क?

ईडी के अनुसार इस कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े मामलों में मनी लॉन्डरिंग निवारण अधिनियम के तहत अब तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 20,367 करोड़ रूपए हो गया है। वहीं विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत 77.86 करोड़ रूपए मूल्य की संपत्तियाँ भी कुर्क की जा चुकी हैं।

8 वरिष्ठ अधिकारी और करीबी सहयोगी गिरफ्तार

ईडी का कहना है कि अनिल अंबानी ग्रुप के खिलाफ पीएफएलए और फेमा के तहत कई मामलों की जांच जारी है। ईडी के अनुसार इस मामले में अनिल ग्रुप के 8 वरिष्ठ अधिकारियों और करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है और सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

सीबीआई की एफआईआर पर एक्शन में ईडी

इस मामले की जांच सीबीआई द्वारा विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों पर दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। एजेंसी का दावा है कि अब तक की जांच में आरएचएफएल और आरसीएफएल द्वारा जुटाए गए 15,548 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के नियंत्रण वाली शेल और समूह कंपनियों के नेटवर्क के ज़रिए कथित तौर पर दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। जांच के दौरान ईडी ने 80 से ज़्यादा परिसरों पर तलाशी भी ली है।