Microplastics in Crops: प्लास्टिक के बढ़ते संपर्क में पौधे की बढ़त 67 फीसदी तक घट गई। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि माइक्रो और नैनोप्लास्टिक गेहूं और टमाटर जैसे खाद्य पौधों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और उनकी बढ़त व सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।
Food Safety Plastic Pollution: हमारे खेतों की मिट्टी में प्लास्टिक की बढ़ती मौजूदगी अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, हमारी थाली के लिए भी खतरे की घंटी बनती दिख रही है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि माइक्रो और नैनोप्लास्टिक गेहूं और टमाटर जैसे खाद्य पौधों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और उनकी बढ़त व सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों ने खेत जैसी असल परिस्थितियों में गेहूं और टमाटर के पौधों पर यह अध्ययन किया।
अध्ययन में पाया गया कि टमाटर पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ा है। प्लास्टिक के बढ़ते संपर्क में पौधे की बढ़त 67 फीसदी तक घट गई। इसी तरह जड़ों की लंबाई में 47 फीसदी और वजन में 82 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि गेहूं अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहा, लेकिन उसकी जड़ों की लंबाई और बायोमास में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
अध्ययन बताता है कि बड़े माइक्रोप्लास्टिक कण जड़ों में फंस जाते हैं, जबकि बेहद सूक्ष्म नैनोप्लास्टिक पौधों के भीतर घुसकर जड़ से पत्तियों तक पहुंच सकते हैं। खास तौर पर कपड़ों से निकलने वाले रेशेदार प्लास्टिक जड़ों को “जाम” कर पोषक तत्वों के प्रवाह को बाधित करते हैं।एक अन्य अध्ययन में भी सामने आया है कि माइक्रोप्लास्टिक वैश्विक स्तर पर पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्षमता को 12 फीसदी तक कम कर सकता है।
अध्ययन में पाया गया कि प्लास्टिक के बेहद महीन कण पौधों की वृद्धि और क्लोरोफिल को कम कर सकते हैं। खास तौर पर कपड़ों से निकलने वाले प्लास्टिक के रेशेदार कण टमाटर के पौधों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह साबित हुए। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जहां माइक्रोप्लास्टिक के बड़े कण पौधों की जड़ों में फंसकर मिट्टी में ही रुक जाते हैं, वहीं नैनोप्लास्टिक इससे कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि पौधे इन्हें सोख लेते हैं और ये जड़, तने को पार करते हुए पत्तियों तक पहुंच जाते हैं। यानी जो प्लास्टिक मिट्टी में है, वह सीधे हमारे भोजन का हिस्सा बन सकता है।
प्लास्टिक के पुराने, घिसे-पिटे कण पौधों में ज्यादा आसानी से प्रवेश करते हैं, जबकि प्लास्टिक के नए कण उतने प्रभावी नहीं होते। समय के साथ प्लास्टिक की सतह बदल जाती है, जिससे वह मिट्टी और जड़ों के साथ ज्यादा चिपकने लगता है।