
Plastic Notes: देश में जल्द ही कागज के बजाय प्लास्टिक के नोट चलन में आने वाले हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) देश के करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव करते हुए इसकी तैयारी कर रहा है। आरबीआइ की नोट मुद्रण शाखा ने पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट्स (प्लास्टिक नोट बनाने वाले बेस मटीरियल) के लिए शुक्रवार को ग्लोबल टेंडर जारी किया है। निविदादाताओं से 18 अगस्त तक प्रस्ताव मांगे गए हैं।
जानकार सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में 10 और 20 रुपए के पॉलीमर (प्लास्टिक) बैंक नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। उसकी सफलता का आंकलन कर बाद में अन्य बड़े नोट जारी किए जाएंगे। यह काम तेजी से होगा और माना जा रहा है कि प्लास्टिक नोटों का पूरी तरह चलन अगले साल से हो सकता है। आरबीआइ गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले माह कहा था कि प्लास्टिक नोटों पर विचार प्रारंभिक स्तर पर है और फायदे-नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया आरबीआइ प्लास्टिक नोट जारी करने के बाद चरणबद्ध रूप से कागज के नोटाें को चलन से वापस लेता रहेगा। कागज के जो नोट चलन में रहेंगे वह बंद नहीं होंगे यानी वैध (लीगल टेंडर) बने रहेंगे।
ऑस्ट्रेलिया से शुरुआत के बाद दुनिया के करीब 60 देशाें में प्लास्टिक नोट चलन में हैं। इनमें कनाडा, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, मलेशिया, थाईलैंड, रोमानिया और ब्रुनेई जैसे देश शामिल हैं।
वर्तमान में, कागजी नोट छापने की तुलना में प्लास्टिक या पॉलीमर नोट तैयार करने की शुरुआती लागत काफी ज्यादा होती है। उदाहरण के तौर पर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक सामान्य 10 रुपये के कागजी नोट को छापने में लगभग 1.01 रुपये खर्च करता है। वहीं प्लास्टिक/पॉलीमर वाले 10 रुपये के नोट की छपाई में अत्याधुनिक सुरक्षा विशेषताओं और विशेष पॉलीमर सामग्री के कारण लागत बढ़कर 2 से 6 रुपये तक हो सकती है।
हालांकि शुरुआती खर्च अधिक होने के बावजूद, लंबे समय में ये पॉलीमर नोट भारतीय अर्थव्यवस्था और रिजर्व बैंक दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। सामान्य कागजी नोट जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं, जिसकी वजह से RBI को इन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। इसके विपरीत, प्लास्टिक के नोट कागजी नोटों की तुलना में तीन से चार गुना अधिक समय तक चल सकते हैं। ये नोट पानी, पसीने, तेल और गंदगी से आसानी से प्रभावित नहीं होते, जिससे उनका उपयोगी जीवन काफी लंबा हो जाता है।