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PM मोदी के भाई के घर पर तैनात पुलिसकर्मी का शराबकांड; अधिकारी रह गए दंग! कोर्ट ने लिया अब यह एक्शन

Security of Prime Minister Modi Brother: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई के घर पर तैनात एक पुलिस कांस्टेबल को अहमदाबाद की अदालत ने एक साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई है। पुलिस कांस्टेबल को ड्यूटी के दौरान शराब पीने का दोषी पाया गया था।

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गुजरात शराबबंदी कानून के उल्लंघन पर पुलिसकर्मी को सख्त सजा। (Photo-X)

Constable Drunk on Duty: गुजरात जैसे शराबबंदी वाले राज्य में अगर कोई आम व्यक्ति शराब पीते पकड़ा जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई तय मानी जाती है। हालांकि, यह मामला किसी आम नागरिक का नहीं, बल्कि एक पुलिसकर्मी का है जिसने प्रधानमंत्री के भाई के घर की सुरक्षा ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन किया, जो मामला और भी ज्यादा गंभीर बनाता है।

अहमदाबाद की एक अदालत ने सुरक्षा ड्यूटी के दौरान शराब पीने के एक पुराने मामले में सख्त फैसला सुनाया है। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े भाई सोमभाई मोदी के घर पर ड्यूटी के दौरान नशे में पाए जाने पर पुलिस कांस्टेबल को एक साल की जेल की सजा दी है। साथ ही, हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2016 का है। लक्ष्मणसिंह परमार नाम का पुलिस कांस्टेबल सोमभाई मोदी के घर पर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात था, जो अहमदाबाद के रानीप इलाके में स्थित है।

15 नवंबर को शाहिबाग पुलिस मुख्यालय के तत्कालीन निरीक्षक आर.एस. तोमर अचानक निरीक्षण के लिए घर पर पहुंचे, तो कांस्टेबल परमार नशे की हालत में पाया गया।

इसके बाद उसे तुरंत सुरक्षा ड्यूटी से हटाया गया और रानीप पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इसके अतिरिक्त, कांस्टेबल पर गुजरात निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

गिरफ्तारी के बाद, जमानत पर छोड़ा

मामला दर्ज होने के बाद कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया, हालांकि बाद में उसे जमानत पर छोड़ दिया गया। इसके बाद अदालत में नियमित रूप से मामले की सुनवाई चली।

अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने मुकदमे में कुल 12 गवाह पेश किए। साथ ही, सबूत के तौर पर कई दस्तावेज भी पेश किए गए। इन सबूतों में फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट सबसे अहम रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, परमार के खून में 0.0747 प्रतिशत एथिल अल्कोहल पाया गया था, जबकि गुजरात निषेध कानून के मुताबिक इसकी अधिकतम सीमा 0.05 प्रतिशत तय है।

अदालत का सख्त रुख और सजा

अहमदाबाद ग्रामीण के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पी.के. पंड्या ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने सच्चाई को सामने रखा और आरोपों को साबित किया है। अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि यह अपराध सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि समाज के खिलाफ भी है।

शराबबंदी कानून का मकसद लोगों को शराब जैसी चीज से दूर रखना है। यह एक सामाजिक बुराई मानी जाती है। हालांकि आरोपी कांस्टेबल ने सजा में छूट देने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

अंत में अदालत ने लक्ष्मणसिंह परमार को एक साल के साधारण कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

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Published on:
24 Jan 2026 08:06 pm
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