
India Russia Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली। बैठक से पहले पीएम मोदी ने पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवाद भेंट किया।
मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार में सवार होकर इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। हालांकि, रिपोर्ट्स में दोनों देशों के बीच एक बड़े रक्षा समझौते की संभावना जताई जा रही है। चर्चा है कि भारत रूस से सुखोई-57 लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर सकता है। यह फाइटर जेट अपनी आधुनिक क्षमताओं और रडार से बच निकलने की क्षमता के लिए जाना जाता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब पुतिन रूस के बाहर आयोजित किसी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो रहे हैं। फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रिक्स की विदेशों में हुई बैठकों में उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी नहीं रही थी। पुतिन के भारत दौरे में ब्रिक्स सम्मेलन के साथ प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी अहम मानी जा रही है। दोनों नेता भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।
मोदी और पुतिन की बैठक में रक्षा सहयोग एक प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है। बड़े रक्षा सौदों को लेकर भी इस मुलाकात पर खास नजर है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ाने पर बातचीत होगी। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत सहयोग रहा है। ऐसे में पुतिन की यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की मेजबानी में दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शनिवार से नई दिल्ली में शुरू होगा। सम्मेलन में खाद्य, ऊर्जा और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आपदा प्रबंधन और जरूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत ऐसे समय ब्रिक्स की बैठक की मेजबानी कर रहा है, जब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और व्यापारिक तनाव का असर है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार एवं टैरिफ नीतियां भी वैश्विक आर्थिक माहौल को प्रभावित कर रही हैं।