राष्ट्रीय

PM मोदी को याद आए स्वामी चिन्मयानंद, बोले- 33 साल पीछे चला गया, गुजरात CM बनने से पहले हुई थी मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिन्मय मिशन के 'अमृत महोत्सव' में शामिल होकर इसे अपने लिए अनूठा आध्यात्मिक अनुभव बताया। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने संतों के स्नेह और आशीर्वाद का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उनके लिए विशेष अवसर है।
2 min read
• •
Updated: 23 Oct 2026, 12:15 PM IST
PM Modi
PM Narendra Modi (Photo-ANI)

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय मिशन के 'चिन्मय अमृत महोत्सव' में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी पुरानी मुलाकात को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक के जरिए स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम को देखकर उन्हें ऐसा लगा, मानो वे 33 साल पीछे चले गए हों। उन्होंने कहा कि 1993 में वडोदरा में गुरुदेव से हुई मुलाकात, बातचीत, उनका स्नेह और आशीर्वाद आज भी उन्हें याद है।

प्रधानमंत्री ने इस विशेष अनुभव के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा और दृष्टिकोण का प्रतीक है, जिसकी नींव स्वामी चिन्मयानंद ने रखी थी। दशकों से मिशन की यात्रा संकल्पों और आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित रही है। ऐसे में भारत मंडपम में आयोजित 'चिन्मय अमृत महोत्सव' का नाम भी गहरा अर्थ रखता है।

युवाओं की शक्ति से मजबूत भारत बनाने पर हुई थी चर्चा

पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि उस चर्चा का मुख्य विषय युवाओं की शक्ति को विकसित करना और उसके माध्यम से एक मजबूत व सक्षम भारत का निर्माण करना था। उन्होंने कहा कि गुरुदेव से मुलाकात के कुछ वर्षों बाद जनता ने उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों से वे सरकार के प्रमुख के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं और इस यात्रा में गुरुदेव का आशीर्वाद उनके साथ रहा है। उन्होंने उस मुलाकात को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताते हुए स्वामी चिन्मयानंद के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के प्रति कृतज्ञता जताई।

आधुनिक तकनीक से जीवंत हुआ पुराना अनुभव

प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल ने उनके मन में उमड़े भावों को और जीवंत कर दिया। स्वामी चिन्मयानंद को होलोग्राम के रूप में देखना और उनसे संवाद करने जैसा अनुभव होना उनके लिए असाधारण रहा। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के साथ 1993 में हुई मुलाकात की यादें इस अनुभव के दौरान फिर से ताजा हो गईं। पीएम मोदी ने कहा कि उस बातचीत में युवाओं को सशक्त बनाने और उनके सामर्थ्य से राष्ट्र निर्माण करने का विचार प्रमुख था।

Updated on:
23 Oct 2026, 12:15 PM IST
Published on: