
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि आयोग सीधे तौर पर बीजेपी और सत्ताधारी पार्टी की मदद कर रहा है। सहरसा में उन्होंने कहा कि यह मामला केवल 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SSR) तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले आठ-दस वर्षों से आयोग की पूरी चुनावी प्रक्रिया सवालों के घेरे में रही है। उन्होनें CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध- प्रदर्शनों को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है।
प्रशांत किशोर ने बताया कि वे पिछले दो महीनों से, यानी जब से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुआ है, इस मुद्दे को लगातार उठाते आ रहे हैं। उनके अनुसार वह प्रदर्शन पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि उसी समय उन्होंने साफ कर दिया था कि जो लोग यह मान रहे हैं कि यह आंदोलन खत्म हो जाएगा या आसानी से दबा दिया जाएगा, वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि समाज का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और बेरोजगारी को लेकर गहरी नाराजगी रखता है। यह नाराजगी किसी न किसी रूप में सामने जरूर आएगी, और आज हम ठीक यही देख रहे हैं।
जन सुराज संस्थापक ने आरोप लगाया कि वोटरों के नाम हटाने के लिए SSR का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव की तारीखें और शेड्यूल तय करने के तरीके पर भी सवाल उठाए।
प्रशांत किशोर ने कहा कि इन सभी बातों को देखकर ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग सीधे तौर पर बीजेपी और सत्ताधारी पार्टी की मदद कर रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
जन सुराज संस्थापक ने आरोप लगाया कि, 'जहां तक चुनाव आयोग की बात है, तो मामला सिर्फ 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SSR) तक ही सीमित नहीं है। पिछले आठ-दस सालों में, चुनाव आयोग की पूरी चुनावी प्रक्रिया और काम करने के तरीके पर सवाल उठे हैं। चाहे वह वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 और फॉर्म 7 का मामला हो, वोटरों के नाम हटाने के लिए SSR का गलत इस्तेमाल हो, या फिर चुनाव की तारीखें और शेड्यूल तय करने का तरीका हो।