
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि सरकार इस साल के अंत तक भी चुनाव करा सकती है। इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। दरअसल, चुनाव से पहले प्रदेश में गुरु रविदास जंयती सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीति का अहम केंद्र बन चुकी है।
दोआबा क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले रविदासिया समुदाय को साधने के लिए राजनीतिक दलों अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हो गए हैं। बता दें कि गुरु रविदास 14वीं-15वीं शताब्दी के महान भक्ति आंदोलन के संत, कवि और समाज सुधारक थे। पंजाब के अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय में उनकी गहरी आस्था है और रविदासिया समाज उन्हें अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानता है।
पंजाब चुनाव में दलित वोट बैंक का काफी महत्व है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, पंजाब में देश की सबसे अधिक करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी रहती है। राज्य की कई विधानसभा सीटों पर दलित मतदाता चुनावी नतीजे बदल सकते हैं।
यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने के लिए गुरु रविदास जयंती को अहम अवसर के रूप में देख रहे हैं। इस बार 20 फरवरी को पड़ने वाली गुरु रविदास जयंती चुनाव प्रचार के बीच आएगी, जिससे इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी का इस बार रविदासिया समाज पर फोकस है। मोदी सरकार ने गुरु रविदास जयंती के अवसर पर विशेष ट्रेन शुरू करने का फैसला लिया है। बीजेपी इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और गुरु रविदास की विरासत के सम्मान के रूप में पेश कर रही है।
इसके अलावा बीजेपी रविदासिया डेरों और धार्मिक संस्थाओं से संपर्क बढ़ाकर अनुसूचित जाति मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
पंजाब में फिलहाल आम आदमी पार्टी की सरकार है। प्रदेश के दलित वोट बैंक को अपनी तरफ करने के लिए आप ने भगवंत मान को सीएम बनाया था। अब AAP सरकरा गुरु रविदास जयंती के लिए सार्वजनिक अवकाश, राज्य स्तर पर समारोहों के आयोजन और श्रद्धालुओं की यात्रा सुविधा जैसी पहल को अपनी उपलब्धि के रूप में सामने रख रही है।
पार्टी इन कदमों को सभी धर्मों के सम्मान और वंचित वर्गों के कल्याण की अपनी नीति से जोड़ते हुए दलित मतदाताओं के बीच समर्थन मजबूत करने की कोशिश करेगी। पंजाब में दलित वर्ग AAP के प्रमुख समर्थन आधारों में शामिल है।
कांग्रेस दोआबा क्षेत्र में रविदासिया समुदाय के बीच अपनी पारंपरिक पकड़ को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ दलित नेताओं की सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है।
पार्टी का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मूल मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस इसी रणनीति के जरिए दलित मतदाताओं से दोबारा जुड़ने की कोशिश करेगी।
शिरोमणि अकाली दल के लिए गुरु रविदास जयंती अपने पारंपरिक सिख और रविदासिया समर्थकों से दोबारा जुड़ने का अवसर है। पार्टी गुरु रविदास के उन भजनों और वाणी को प्रमुखता से सामने रखेगी, जो गुरु ग्रंथ साहिब में भी संकलित हैं।