
Punjab OBC Vote Bank: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। इससे पहले बीजेपी ने राजनीतिक समीकरण बनाने और तैयारी तेज कर दी है। वहीं चुनाव से पहले भाजपा ओबीसी समुदाय को साधने के लिए बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू कर दिया है। प्रदेश में ओबीसी समुदाय का वोटों की काफी अहमियत है। यही वजह है पार्टी ने फाजिल्का जिले के अबोहर में सर्व समाज ओबीसी महासम्मेलन का आयोजन किया। साथ ही चुनावी तैयारियों का आगाज भी कर दिया है।
साल 2025 की वोटर लिस्ट के मुताबिक पंजाब में करीब 2.14 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। हालांकि चुनाव आयोग जातिवार आंकड़े जारी नहीं करता, लेकिन विभिन्न अनुमानों के अनुसार राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) मतदाताओं की संख्या करीब 68.3 लाख (31.94 प्रतिशत) और ओबीसी मतदाताओं की संख्या 66 से 68 लाख (करीब 31-32 प्रतिशत) के बीच मानी जाती है।
इस तरह एससी और ओबीसी समुदाय मिलकर पंजाब के कुल मतदाताओं का लगभग दो-तिहाई हिस्सा बनाते हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल को यदि इन वर्गों का समर्थन मिल जाए तो वह चुनाव जीत सकता है।
बत दें कि पंजाब की राजनीति सिख किसान नेतृत्व, क्षेत्रीय पहचान और जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन बीजेपी अब प्रदेश में नई सामाजिक और राजनीतिक संरचना तैयार करने की कोशिश कर रही है।
पार्टी का लक्ष्य उन समुदायों को अपने साथ जोड़ना है जो अब तक उसके स्थायी वोट बैंक का हिस्सा नहीं रहे हैं। दरअसल. पार्टी उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में अपनाए गए अपने सफल ओबीसी मॉडल को पंजाब में भी दोहराने की तैयारी में है।
बीजेपी ने दावा किया है कि अबोहर में सम्मेलन आयोजित करना फाजिल्का, फिरोजपुर और श्री मुक्तसर साहिब जिलों की करीब 15 विधानसभा सीटों के मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास है। इन क्षेत्रों में ओबीसी समुदाय की संख्या काफी प्रभावशाली मानी जाती है।
कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़, पूर्व मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बीजेपी ओबीसी समुदाय के बड़े हिस्से को अपने पक्ष में करने में सफल रहती है, तो इसका असर विशेष रूप से मालवा क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर पड़ सकता है। यहां जातीय समीकरण अक्सर चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।