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स्टडी अलर्ट: ऑनलाइन बीमारी सर्च की आदत बन रही भारी, हर पांचवां युवा साइबरकॉन्ड्रिया का शिकार

Cyberchondria Symptoms: अध्ययन में खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन बीमारी खोजने की आदत से युवाओं में चिंता और तनाव बढ़ रहा है। हर पांचवां युवा साइबरकॉन्ड्रिया की चपेट में पाया गया है।

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Cyberchondria rising due to online health searches.

प्रतीकात्मक तस्वीर

Cyberchondria: सिरदर्द हुआ नहीं कि हम अक्सर गूगल या एआई पर सर्च कर लेते हैं- 'सिरदर्द के कारण'। कुछ लोग इस बारे में बहुत ज्यादा सर्च करने और गहराई में पढ़ने लगे हैं, इससे उनके मन में शंका घर कर रही है कि उन्हें कहीं कोई बड़ी बीमारी तो नहीं हुई? यह आदत साइबरकॉन्ड्रिया बन चुकी हैं। नागपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों की टीम ने ताजा अध्ययन में बताया कि 'साइबरकॉन्ड्रिया' हर पांचवे युवा को अपनी पकड़ में ले चुका है। कोविड महामारी के बाद यह समस्या बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार, 53 फीसदी लोगों को ऑनलाइन सर्च करने के बाद चिंता, तनाव या पैसे का नुकसान हुआ। करीब 60 फीसदी ने ऑनलाइन सर्च के बाद मिली जानकारियों की वजह से डॉक्टर से सलाह ली। पता चला कि वास्तव में उन्हें वो समस्या थी ही नहीं जिसके लिए वे अस्पताल आए। अध्ययन में चेताया गया कि इसकी वजह से भ्रामक स्वास्थ्य जानकारियां फैलने, युवाओं में चिंताएं बढ़ने और अनावश्यक चिकित्सा लेने के खतरे बढ़ रहे हैं। यह अध्ययन 18-40 साल के मरीजों पर किए शोध के बाद सामने आए।

कम उम्र, ज्यादा प्रभाव

  • करीब 18.5 फीसदी में साइबरकॉन्ड्रिया मिला। 70 फीसदी युवा 18 से 30 साल के थे, यानी जितनी उम कम, उतना ज्यादा प्रभाव।
  • जो रोज एआई इस्तेमाल करते हैं, लंबे समय से इंटरनेट पर बीमारियों के बारे में पढ़ रहे हैं और स्वयं या उनका कोई करीबी पहले से किसी बीमारी से पीड़ित है, उनमें समस्या ज्यादा।

क्यों बढ़ रही समस्या?

युवा काफी समय इंटरनेट पर बिता रहे हैं। हर छोटी स्वास्थ्य समस्या के बारे में गूगल पर सर्च कर रहे हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार देश में 92 फीसदी लोग रोज इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं, 61 फीसदी लोग तो रोज 4 घंटे से ज्यादा ऑनलाइन रहते हैं। 70 फीसदी रात में भी गैर-जरूरी कामों के लिए इंटरनेट यूज करते हैं। इस दौरान बीमारियों या शारीरिक तकलीफों के बारे में पढ़ने का उन बहुत समय मिल रहा है।

डॉक्टरी सलाह : गूगल या एआई डॉक्टर नहीं

डॉक्टरों ने बताया कि इंटरनेट पर स्वास्थ्य जानकारी लेना पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन बहुत सर्च करना नुकसानदायक हो सकता है। बीमारियों या लक्षणों के बारे में जानकारी के लिए भरोसेमंद वेबसाइट्स जैसे स्वास्थ्य मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन, प्रमुख चिकित्सा संस्थानों पर ही भरोसा करना चाहिए। हर छोटी समस्या पर गूगल को डॉक्टर न बनाएं। इंटरनेट दोस्त हो सकता है, डॉक्टर नहीं।

लगातार जताई जा रही चिंता

  • 2024 में इंडियन जर्नल ऑफ साइकियाट्री ने बताया कि 4.4 फीसदी मामलों में हाई-सीवियर साइबरकॉन्ड्रिया मिल रहा है।
  • 2025 में आई रिपोर्ट 'भारतीय वयस्कों में साइबरकॉन्ड्रिया' में स्मार्टफोन की लत की वजह से साइबरकॉन्ड्रिया बढ़ रहा है।
  • 2025 में इंडियन जर्नल ऑफ साइकियाट्री ने फिर बताया कि भारत में वयस्कों की समस्त आबादी का 7.9 फीसदी हिस्सा हाई से मॉडरेट साइबरकॉन्ड्रिया की चपेट में है।
  • दक्षिण भारत में आईटी प्रोफेशनलों में से करीब 55 फीसदी तो उत्तर प्रदेश में करीब 45 फीसदी युवाओं को बीमारियों के बारे में इंटरनेट सर्च कर चिंता करने वाला बताया गया।