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पंजाब CMO भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट सख्त, CBI को 2 महीने में रिपोर्ट देने का दिया निर्देश

Punjab CMO Corruption: पंजाब CMO में कथित भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। CBI जांच करेगी और दो महीने में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी।
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फोटो में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (सोर्स- ANI)

Punjab-Haryana High Court: पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपते हुए दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अब CBI इस पूरे मामले की जांच करेगी और सामने आए तथ्यों की पड़ताल करेगी।

राज्य को लूटा है, सजा मिलनी चाहिए: प्रताप बाजवा

इस बीच पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सोमवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया जिसमें एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) द्वारा पंजाब के DGP को लिखे गए लेटर के मामले की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से जांच कराने का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राज्य को लूटा है, उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए, चाहे उनका रुतबा कुछ भी हो।

'X' पर बात करते हुए बाजवा ने कहा- ‘मैं माननीय हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं और उम्मीद करता हूं कि CBI निष्पक्ष, बिना भेदभाव वाली और समय पर जांच करेगी। जिन लोगों ने पंजाब का खजाना लूटा है, उन पर मामला दर्ज होना चाहिए और उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए, चाहे वे कितने भी ताकतवर क्यों न हों।’

CBI को दो महीने के अंदर रिपोर्ट देने का आदेश

CBI को दो महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देने का भी आदेश दिया गया है। बता दें ED ने पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) गौरव यादव को तीन लेटर लिखे थे, जिनमें कहा गया था कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुमन और उनके साथी नितिन गोहल और बीर देविंदर करप्शन में शामिल हैं और उनके खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि वे एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रांसफर और पोस्टिंग के साथ-साथ सरकारी टेंडर में भी दखल दे रहे थे। जब पंजाब पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज नहीं किया, तो पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक PIL फाइल की गई, जिसमें केस को CBI को सौंपने की मांग की गई। यह PIL एडवोकेट निखिल सराफ ने फाइल की थी। सराफ ने पिटीशन में कहा था कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के लेटर में पंजाब के मुख्यमंत्री ऑफिस से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सराफ ने दलील दी कि केस को ‘फेयर और इंडिपेंडेंट इन्वेस्टिगेशन’ के लिए CBI को सौंप दिया जाना चाहिए, जो पंजाब पुलिस और पंजाब विजिलेंस के असर से मुक्त हो। याचिकाकर्ता ने मनी ट्रेल की डिटेल्ड जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की।