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‘पंजाब की वो मां, जिसकी आंखों के सामने उसके 5 बेटे एक-एक कर जिंदगी खोते गए और वो कुछ नहीं कर पाई’

Punjab Drug Tragedy: पंजाब के कपूरथला में नशे ने उजाड़ दिया एक मां का पूरा संसार। मनजीत ने अपनी आंखों के सामने अपने 5 जवान बेटों को नशे की बलि चढ़ते देखा। प्रशासन के दावों के बीच एक परिवार की बर्बादी की ये कहानी आपको झकझोर देगी।
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Updated: 10 Apr 2026, 5:51 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर

Drugs addiction in Punjab: पंजाब में नशे की भयावह तस्वीर सामने आई है, जहां मां ने एक-एक कर अपने 5 जवान बेटों को खो दिया। यह घटना राज्य सरकार की तरफ से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दरअसल, कपूरथला के पंडोरी मोहल्ले में रहने वाली मनजीत का घर एक पुलिस स्टेशन से 100 मीटर की दूरी पर है, जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना के फंड से बनाया गया है। चार कमरे के इस छोटे से घर में अब मातम पसरा है। मनजीत के पति जसविंदर पाल की तबीयत ठीक नहीं रहती। मंजीत के पांचों बेटों की मौत अलग-अलग समय पर हुई, लेकिन वजह एक ही रही, नशे की लत। सबसे बड़े बेटे जसविंदर सिंह की 26 साल की उम्र में मौत हुई, इसके बाद बलविंदर, रवि, मित्तू और हाल ही में 33 वर्षीय सोनू ने भी दम तोड़ दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 10 दिन पहले जब सोनू की हालत बिगड़ने लगी, तो परेशान मनजीत ने पुलिस को फोन किया। जब यह बात वायरल हुई, तो पुलिस और जिला चिकित्सा अधिकारियों ने सोनू को एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे अमृतसर के एक सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान निःशुल्क इलाज के पेशकश भी की थी, लेकिन, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

इस बारे में कपूरथला के सिविल सर्जन डॉ. संजीव भगत बताते हैं कि सोनू की हालत के बारे में पता चलने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से अमृतसर के गुरु नानक मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। डॉ. भगत ने बताया कि सोनू को सीने में गंभीर इन्फेक्शन हो गया था। उसके फेफड़ों में पानी भर गया था। आखिरकार, अचानक दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई।

5वें बेटे की मौत से टूट गई मनजीत

पांचवें बेटे की मौत पर मनजीत पूरी तरह टूट गई हैं। उनका कहना है कि नशे की वजह से उसने अपने पांचों बेटों को एक-एक कर खो दिया। मनजीत के सबसे बड़े बेटे जसविंदर सिंह 'जस्सा' की मौत शराब की लत के चलते हुई; उस समय वह 26 साल का था। तीन महीने बाद, 25 साल के बलविंदर की भी मौत हो गई। 30 साल के रवि की मौत 2021 में कपूरथला जेल में कैद के दौरान हुई। परिवार का दावा है कि उस पर नशीले पदार्थ बेचने के झूठे आरोप लगाए गए थे। वहीं, 32 साल के मिट्ठू की मौत 2023 में हुई। हालांकि आम आदमी पार्टी और स्थानीय पुलिस ने दावे को निराधार बताया है।

मोहल्ले में कई परिवारों की कहानी

नशे की लत के चलते पंडोरी मुहल्ले में सिर्फ मनजीत नहीं बल्कि कई घरों में मौत हुई है। गांव वालों के मुताबिक, जिन ज्यादातर युवाओं की मौत हुई, वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। दिहाड़ी मज़दूर के तौर पर काम करते थे।

चरणजीत कौर बताती है कि उनके बड़े बेटे हरप्रीत की 2019 में 34 साल की उम्र में मौत हुई थी। नशे की लत से 10 साल जूझने के बाद सड़क किनारे उसकी लाश मिली थी। 2023 में उन्होंने अपने 30 साल छोटे बेटे हरजीत को भी खो दिया, जो दीवारों पर पेंटिंग करके गुजारा करता था।

वहीं, सुनीता रानी बताती हैं कि जब उनके बेटे लवप्रीत को नशे की लत लगी। तब वह एक सरकारी स्कूल में 12वीं क्लास में पढ़ता था। 2014 में हमें सड़क किनारे उसकी लाश मिली; उसकी मौत नशे की ओवरडोज से हुई थी।

नशा-विरोधी अभियान में सफलता का दावा

राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार के मुताबिक, नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को काफी सफलता मिली है, जिसमें दोषियों को सजा दिलवाना भी शामिल है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि उनका मुख्य जोर कानून लागू करने पर ही नहीं, बल्कि नश के खिलाफ समुदाय की भागीदारी पर भी है।

वहीं इसको लेकर पंजाब के DGP (लॉ एंड ऑर्डर) अर्पित शुक्ला का कहना है कि साल भर चले इस अभियान के दौरान हमने लगभग 80,119 मामले दर्ज किए हैं। 54,119 लोगों को गिरफ्तार किया है और 2,384 किलोग्राम से ज्यादा हेरोइन बरामद की है।

Updated on:
10 Apr 2026, 5:51 PM IST
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