Punjab Politics: जालंधर से 8 किलोमीटर दूर बल्लन गांव में यह डेरा स्थित है। इस इलाके में दलित वोट बैंक ज्यादा है। बता दें कि पंजाब की आबादी में दलितों की संख्या 32 प्रतिशत है...
Punjab Assembly Elections 2027: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मास्टरस्ट्रोक खेलने वाले हैं। दरअसल, 1 फरवरी को रविदास जयंती के अवसर पर जालंधर के पास बल्लन स्थित डेरा सचखंड का दौरा करने वाले हैं, जो दलित समुदाय तक पहुंचने का एक और प्रयास है। दरअसल, पंजाब की राजनीति में डेरा बल्लन का दबदबा माना जाता है।
जालंधर से 8 किलोमीटर दूर बल्लन गांव में यह डेरा स्थित है। इस इलाके में दलित वोट बैंक ज्यादा है। बता दें कि पंजाब की आबादी में दलितों की संख्या 32 प्रतिशत है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। अनुसूचित जाति (एससी) की अधिकांश आबादी दोआबा में केंद्रित है, जो यहां की कुल आबादी का 45% है।
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, दोआबा से पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में 23 सदस्य जाते हैं और डेरा कम से कम 19 सीटों पर अपना दबदबा रखता है।
बता दें कि प्रदेश के 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में इस डेरा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दरअसल, AAP की लहर के बाद भी कांग्रेस ने दोआबा में अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही है। इस क्षेत्र की 23 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 10 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं आम आदमी पार्टी को भी 10 सीटें मिली। सुखबीर बादल के नेतृत्व वाली SAD, मायावती की बहुजन समाज पार्टी और भाजपा को सिर्फ एक-एक सीट मिली।
डेरा प्रमुख निरंजन दास को पद्म श्री अवार्ड (padma shri) से सम्मानित किया जाएगा। दिसंबर में डेरा प्रमुख निरंजन दास ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर 1 फरवरी को गुरु रविदास के गुरुपर्व समारोह में आमंत्रित किया था और साथ ही अगले वर्ष आध्यात्मिक नेता की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में देशव्यापी समारोह आयोजित करने का अनुरोध किया था।
यह डेरा 2009 में सबसे ज्यादा चर्चा में आया था। दरअसल, मई 2009 में ऑस्ट्रिया के वियना में अपने उपनेता संत रामानंद की हत्या हुई थी। इस घटना के बाद कट्टरपंथी सिखों और दलितों के बीच हिंसा को जन्म दिया। उस हमले में पांचवें और वर्तमान प्रमुख, निरंजन दास, भी घायल हो गए थे।
कट्टरपंथी सिखों द्वारा संत रामानंद की हत्या के कारण रविदासिया धर्म की स्थापना हुई, जो मुख्य रूप से दलित समुदाय के उस वर्ग द्वारा स्थापित किया गया था जो पहले सिख धर्म से जुड़ा हुआ था।