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CJP Rakesh Tikait Meeting: “क्या मोदी सरकार चारों तरफ से घिरने लगी है? किसानों और छात्रों की नई रणनीति ने बढ़ाई सियासी हलचल!

NEET Paper Leak Protest : नीट धांधली और पेपर लीक के खिलाफ 36 दिनों तक संसद से लेकर सड़क तक हुंकार भरने के बाद, युवाओं के इस नए मोर्चे ने अब देश के अन्नदाताओं से हाथ मिला लिया है। पुलिसिया मुकदमे वापस न होने से भड़के युवा नेताओं ने दिल्ली में किसान नेता राकेश टिकैत से बंद कमरे में रणनीति तैयार की। क्या छात्रों और किसानों की यह नई जुगलबंदी केंद्र की सियासत में एक नया भूचाल लाने वाली है?
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CJP Rakesh Tikait Meeting
CJP Rakesh Tikait Meeting : आंदोलन की नई पटकथा तैयार? टिकैत और CJP की मुलाकात के बाद देशभर में चर्चा तेज

Farmers Students Protest: नीट परीक्षा धांधली के खिलाफ चले 36 दिनों के लंबे और आक्रामक आंदोलन के स्थगन के महज कुछ ही दिनों बाद देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। शिक्षा तंत्र में सुधार और पेपर लीक के खिलाफ बिगुल फूंकने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब अपने आंदोलन का दायरा बढ़ाकर इसे देशव्यापी रूप देने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को दिल्ली में CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और प्रमुख चेहरा आशुतोष रांका की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की।

दोनों पक्षों के बीच हुई इस मैराथन बैठक में किसानों, छात्रों और युवाओं का एक संयुक्त और मजबूत साझा मंच तैयार करने की रणनीति पर विस्तार से मंथन हुआ। इस बैठक के बाद आशुतोष रांका ने साफ शब्दों में हुंकार भरते हुए कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि देश के किसान भाई, छात्र और युवा एक साथ आकर इस आंदोलन को ऐसा व्यापक रूप देंगे, जिससे केंद्र सरकार को चारों तरफ से घेरा जा सके।"

वायदाखिलाफी का आरोप: FIR वापस न होने पर फिर भड़के युवा

उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर CJP के संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तीखी झड़पें हुई थीं, जिसमें वॉटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का सामना करना पड़ा था। तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा धांधली की जांच को लेकर शुरू हुआ यह उग्र प्रदर्शन आखिरकार 25 जुलाई को तब खत्म हुआ था, जब शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया और सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने तथा प्रभावितों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया।

हालांकि, CJP का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने वादे पूरे नहीं किए हैं। आशुतोष रांका का कहना है कि राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में निर्दोष छात्र-छात्राओं पर पुलिसिया कार्रवाई और नई एफआईआर (FIR) दर्ज करने का सिलसिला अब भी जारी है। इसी वायदाखिलाफी के विरोध में संगठन ने अब किसान संगठनों का समर्थन मांगा है।

राकेश टिकैत का मिला साथ: किसान-युवा एकता की नई रणनीति

जंतर-मंतर पर जारी धरने के समय से ही छात्रों की मांगों का समर्थन कर रहे किसान नेता राकेश टिकैत ने इस नए मोर्चे का स्वागत किया है। टिकैत ने कहा कि देश का किसान और युवा दो ऐसे स्तंभ हैं, जिन्हें अगर अनदेखा किया गया तो एक बड़ा जनांदोलन खड़ा होना तय है। बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं पर दर्ज मुकदमों के मुद्दे पर टिकैत ने छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का भरोसा दिलाया है।

क्या है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)?

मई 2026 में सोशल मीडिया रणनीतिकार अभिजीत दीपके द्वारा गठित इस युवा मोर्चे ने अपनी अनोखी शैली और सीधे मुद्दों के दम पर देशभर के करोड़ों छात्रों और बेरोजगारों के बीच अभूतपूर्व लोकप्रियता हासिल की है। हालिया नीट पेपर लीक आंदोलन में IIT और LSE ग्रेजुएट आशुतोष रांका और पत्रकार सौरभ दास जैसे चेहरों ने सरकार के साथ हुई वार्ता में छात्रों का पक्ष मजबूती से रखा था।

बड़े आंदोलन की आहट

यदि केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों को तुरंत प्रभाव से वापस नहीं लेती हैं, तो CJP और BKU की यह नई जुगलबंदी पूरे देश में एक अभूतपूर्व संयुक्त आंदोलन की नींव रख सकती है। छात्रों के आक्रोश और किसानों के लंबे अनुभव का यह संगम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है।

Updated on:
29 Jul 2026 12:18 pm
Published on:
29 Jul 2026 12:18 pm