
Ram Mandir: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का खुलासा एक गार्ड की सतर्कता से हुआ था। मंदिर के शौचालय में मिले 40 हजार रुपये की जानकारी जब मंदिर प्रबंधन को हुई तो उसने मामले की जांच शुरू की। बाद में मुकदमा दर्ज होने के 17 घंटे के अंदर ही पुलिस टीमों ने विभिन्न स्थानों से 80 लाख रुपये और जेवरात बरामद कर लिए थे।
दरअसल, यह घटना मई के अंतिम सप्ताह की है। मंदिर परिसर के एक शौचालय में नोटों की गड्डियां छुपाकर रखी गई थीं, जिसमें कुल 40,000 की नकदी थी। ड्यूटी पर मुस्तैद गेटकीपर की नजर जब इन लावारिस नोटों पर पड़ी, तो उसने इसकी सूचना ट्रस्ट के पदाधिकारियों को दी। शौचालय से मिले इस नोटों के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने 21 सदस्यीय एक आंतरिक जांच समिति गठित की।
काउंटिंग सेंटर के कर्मचारियों से प्रारंभिक पूछताछ के बाद जैसे ही 4 जून को पुलिस ने एफआइआर दर्ज की, जांच का दायरा बढ़ा। पुलिस और ट्रस्ट के अधिकारियों ने अयोध्या, बहराइच और प्रतापगढ़ समेत कई जिलों में संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की। 17 घंटों के भीतर आरोपियों के कब्ज़े से करीब 80 लाख की चोरी की गई नकदी और कीमती आभूषण बरामद कर लिए गए।
शुरुआती जांच में पता चला, दानपात्र और काउंटिंग रूम से रकम पार करने के बाद उसे सीधे परिसर से बाहर नहीं ले जाया जाता था, क्योंकि वहां कड़ी सुरक्षा जांच होती थी। चोरों ने इसके लिए मंदिर के वीआइपी वॉशरूम को अपना 'सेफ हाउस' बनाया था। नोटों को वहां छिपा दिया जाता था और फिर सुरक्षा जांच ढीली होने या ड्यूटी बदलने के वक्त उन्हें धीरे से परिसर से बाहर निकाल लिया जाता था।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआइटी ने सरकार से और समय मांगा है। फाइनल रिपोर्ट देने से पहले एसआइटी एक बार और अयोध्या जा सकती है। सूत्रों के अनुसार एसआइटी अपनी फाइनल रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है। मामले की सुनवाई 20 जुलाई को है और कोर्ट ने एसआइटी से इसी दिन जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। स्टेटस रिपोर्ट के बाद ही न्यायालय सीबआइ जांच समेत विभिन्न मांगो पर निर्णय लेगा।
बद्रीनाथ धाम के चढ़ावा चोरी मामले में एसआइटी ने शुक्रवार को बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को गिरफ्तार किया। चौहान 30 जून को सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस के अनुसार, दान कक्ष की सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान चौहान की भूमिका सामने आई। फुटेज में वह 22 जून, 25 जून और 29 जून को दान की गिनती के दौरान नकदी जेब में रखते दिखाई दिए।
इन तीनों घटनाओं के अगले दिन वह सेवानिवृत्त हो गए। एसआइटी का दावा है कि मामले में पहले गिरफ्तार निलंबित बीकेटीसी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल और राजेंद्र चौहान के बीच मिलीभगत के शुरुआती साक्ष्य मिले हैं। नौटियाल पहले ही गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में है।