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‘राहुल गांधी का वादा निकला छलावा’, रांची में उग्र हुए छात्र, दी चेतावनी- मांगें नहीं मानी तो भगत सिंह बनने में देर नहीं लगेगी

Jharkhand Student Protest: 'मांगें नहीं मानी तो भगत सिंह बनेंगे।' रांची में उग्र हुए छात्रों ने राहुल गांधी और सीएम सोरेन पर लगाया धोखे का आरोप। 20 अगस्त को सीएम आवास घेराव का किया ऐलान।
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Aug 16, 2026
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रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों का राहुल गांधी पर बड़ा आरोप (फोटो सोर्स- ANI)

Jharkhand Protest:झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली और गड़बड़ियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों का गुस्सा अब चरम पर है। आंदोलन के 23वें दिन प्रदर्शनकारी युवाओं ने न सिर्फ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। सीधी चेतावनी देते हुए छात्रों ने ऐलान किया है कि अगर सरकार ने उनकी जायज मांगें पूरी नहीं कीं, तो उन्हें गांधीवादी रास्ता छोड़कर 'भगत सिंह' बनने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने राहुल गांधी पर छलावा करने का आरोप लगाया है।

पुतला दहन का ऐलान, 20 अगस्त को सीएम आवास का घेराव

छात्रों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का पुतला दहन करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की योजना बनाई है। छात्रों का कहना है कि अब वे सरकार के किसी भी खोखले आश्वासन को स्वीकार नहीं करेंगे और साथ ही सीएम के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं।

'अगर राहुल गांधी साथ हैं, तो समर्थन वापस लें'

आंदोलन से जुड़े छात्रों ने कहा कि अगर राहुल गांधी वाकई उनके मुद्दों के प्रति गंभीर हैं, तो वे सिर्फ बयानबाजी करने के बजाय धरातल पर एक्शन लें। छात्रों का कहना है कि झारखंड सरकार में कांग्रेस के 16 विधायक शामिल हैं और यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन युवाओं की जायज मांगें नहीं मान रहे हैं, तो राहुल गांधी को तुरंत अपनी पार्टी का समर्थन वापस लेकर सरकार से बाहर आ जाना चाहिए। छात्रों का साफ मानना है कि बातचीत के नाम पर उनके साथ केवल धोखा हुआ है।
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अभी तक यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और गांधीवादी रास्ते पर चल रहा था। लेकिन अगर सरकार युवाओं की मांगों पर गंभीरता से अमल नहीं करती है, तो उन्हें क्रांतिकारी रास्ता अपनाने और 'भगत सिंह' बनने में जरा भी देर नहीं लगेगी।

क्या दांव पर लगी है हेमंत सोरेन की सरकार?

छात्रों के इस सख्त रुख और कांग्रेस से समर्थन वापसी की मांग ने राज्य के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। झारखंड की कुल 81 विधानसभा सीटों वाले सदन में बहुमत के लिए 41 विधायकों की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान में सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक 56 सीटों के विशाल बहुमत के साथ सरकार चला रहा है। इस गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 34, कांग्रेस के पास 16, राष्ट्रीय जनता दल के पास 4 और भाकपा-माले के पास 2 सीटें मौजूद हैं। दूसरी ओर, विपक्षी एनडीए खेमे के पास कुल 24 सीटें हैं, जिनमें भाजपा के 21 विधायकों के अलावा आजसू, जदयू और लोजपा का एक-एक विधायक शामिल है।

Updated on:
16 Aug 2026 12:10 pm
Published on:
16 Aug 2026 11:49 am