
Ravneet Singh Bittu on Punjab Paper Leak:पंजाब में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में पेपर लीक हुए और उन्हें बेचा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों जैसे जरूरी काम करने वाले कर्मचारियों को न तो स्थायी किया गया और न ही उन्हें उचित रोजगार मिला। बिट्टू ने कहा कि इन मामलों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री तथा शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
पंजाब में कथित पेपर लीक को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस राज्य सरकार पर भर्ती परीक्षाओं और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के आरोप लगा रही हैं। दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा का दावा है कि नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा, कृषि अधिकारी भर्ती परीक्षा और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज की फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा समेत कई मामलों में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने इन मामलों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से इस्तीफे की मांग की है।
आम आदमी पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया का कहना है कि पंजाब में कोई पेपर लीक नहीं हुआ है और भाजपा तथा कांग्रेस राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए झूठी अफवाहें फैला रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया के जरिए पेपर लीक को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है।
मनीष सिसोदिया के मुताबिक, जिस घटना को पेपर लीक बताया जा रहा है, वह वास्तव में परीक्षा के दौरान नकल की कोशिश का मामला था। उन्होंने कहा कि एक विश्वविद्यालय की परीक्षा में कुछ छात्र ब्लूटूथ वाला स्मार्ट पेन लेकर पहुंचे थे, जिसे परीक्षा अधिकारियों ने मौके पर ही जब्त कर लिया। इसके बाद संबंधित छात्रों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। सिसोदिया ने कहा कि इस घटना को पेपर लीक बताना गलत है और पंजाब में ऐसी कोई घटना नहीं हुई।
पंजाब में कथित पेपर लीक का मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है। एक ओर भाजपा और कांग्रेस राज्य सरकार से जवाब मांग रही हैं, वहीं आम आदमी पार्टी लगातार इन आरोपों को निराधार बता रही है। ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं और विवाद अभी भी जारी है।