Republic Day Pakistan Conspiracy: ऑपरेशन सिंदूर में करारी हार के बाद पाकिस्तानी सेना और आतंकी संगठनों की नजदीकियां फिर सामने आई हैं। एक रैली के दौरान आतंकियों ने न सिर्फ भारत को धमकी दी, बल्कि पाक सेना के खुले समर्थन का दावा भी किया।
Pakistan Terrorist Rally Rahim Yar Khan: भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर पाकिस्तान की नापाक हरकतें सामने आ रही हैं। एक ओर, एक पाकिस्तानी भारत में घुसपैठ करते हुए पकड़ा गया, तो दूसरी ओर, पाकिस्तानी आतंकवादी पाकिस्तान में खुले मंच से भारत को धमकियां दे रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की बेचैनी अब खुलकर सामने आने लगी है। साथ ही, आतंकी संगठनों और पाकिस्तानी सेना की मिलीभगत के नए सबूत भी सामने आए हैं। भारत के खिलाफ साजिश की खुली बातें की जा रही हैं।
एक रैली के दौरान आतंकियों ने भारत को धमकी दी और यह भी कबूल किया कि उन्हें पाक सेना का पूरा समर्थन प्राप्त है। यही नहीं, आतंकियों ने पाकिस्तान की राजनीति में उतरने की मंशा भी जाहिर की, जो मौजूदा हालात को और गंभीर बना देता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के रहीम यार खान में आतंकी संगठनों की एक रैली आयोजित की गई। रैली के मंच से जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने भारत के खिलाफ तीखे और भड़काऊ बयान दिए।
जमात-उद-दावा के नेता अताउल्लाह गिलजई ने दावा किया कि वह 'भारत का नक्शा बदलने' की ताकत रखता है और इसके लिए पूरी तरह तैयार है। उसने यह भी कहा कि उनके साथी भारत के अंदर तक पहुंच सकते हैं। इस बयान ने एक बार फिर पाकिस्तान की मंशा जाहिर की।
इस रैली में एक चौंका देने वाला बयान सामने आया। आतंकियों ने खुलेआम यह स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सेना उनका समर्थन करती है। अताउल्लाह गिलजई ने कहा कि वे पाक सेना के साथ तालमेल बनाकर काम कर रहे हैं और नेताओं को भी अपने साथ बैठने का न्योता दिया है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद से दूरी बनाने का दावा कर रहा है। मामले के जानकारों के मुताबिक, ऐसे बयान पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भूमिका और उसके नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
लश्कर के टॉप कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने इस रैली के माध्यम से पाकिस्तान की राजनीति में आने का ऐलान भी किया है। उसने कहा कि दुनिया उनसे डर रही है और मदरसों में पढ़ने वाले छात्र जिहाद के लिए तैयार हैं।
कसूरी ने डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पेशों की आलोचना करते हुए उन्हें खारिज किया और कहा कि समाज को शरिया कानून से चलाने के लिए 'तालिबान शैली' के लड़ाकों की जरूरत है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे बयान कश्मीर मुद्दे को फिर से भड़काने और पाकिस्तान के अंदर के असंतोष से ध्यान भटकाने की राजनीति हैं।