
पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई राज्यसभा से रिटायर हुए।( फोटो: ANI)
Former CJI: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (Former CJI) रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) का राज्यसभा (Rajya Sabha) कार्यकाल समाप्त हो गया है। वे पूरे छह साल (Six Years) तक संसद (Parliament) के उच्च सदन के मनोनीत सदस्य (Nominated Member) रहे। उनके इस कार्यकाल का रिकॉर्ड काफी चर्चा (Trending News) का विषय बना हुआ है। अहम बात यह है कि उन्होंने सदन में एक भी सवाल (Zero Questions) नहीं पूछा। पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने सिर्फ एक बार अहम बहस (One Debate) में हिस्सा लिया। संसद में उनकी कुल उपस्थिति (Attendance) महज 53 प्रतिशत (Percent) ही दर्ज की गई। मार्च 2020 में उन्हें केंद्र सरकार (Central Government) ने उच्च सदन के लिए नामित किया था। उनकी यह नियुक्ति कई वजहों से विवादों (Controversy) में भी घिरी रही थी। उन्होंने अपने 6 साल में केवल दिल्ली सेवा बिल (Delhi Services Bill) के मुद्दे पर अपना भाषण (Speech) दिया था। विदाई के वक्त राज्यसभा सभापति (Rajya Sabha Chairman) ने उनके अपार कानूनी ज्ञान (Legal Knowledge) की जमकर तारीफ की।
मार्च 2020 में रिटायरमेंट के चार महीने बाद ही रंजन गोगोई को राज्यसभा भेजा गया था। तब इस फैसले ने कई सवाल खड़े किए थे। राज्यसभा की वेबसाइट और पीआरएस (PRS) के डेटा के अनुसार, पिछले छह वर्षों में उनका विधायी प्रदर्शन बहुत सक्रिय नहीं रहा। उन्होंने पूरे 6 साल में एक भी सवाल नहीं पूछा और ना ही कोई प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया। कई अहम कानूनों जैसे कृषि कानून, नए आपराधिक कानून और महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया।
गोगोई ने अगस्त 2023 में दिल्ली सेवा बिल से जुड़ी बहस में हिस्सा लिया था। उन्होंने इस बिल का समर्थन किया था जो चुनी हुई दिल्ली सरकार की शक्तियों को सीमित करने वाला था। अपने भाषण में उन्होंने 'मूल संरचना के सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) पर भी टिप्पणी की थी, जिसने काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
दिसंबर 2021 में एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे कम उपस्थिति (Low Attendance) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा था कि वे अपनी मर्जी से राज्यसभा जाते हैं। जब उन्हें लगता है कि किसी अहम मुद्दे पर उन्हें अपनी बात रखनी चाहिए, तभी वे सदन में जाते हैं। गोगोई ने यह भी स्पष्ट किया था कि वे किसी भी पार्टी के व्हिप (Party Whip) से बंधे हुए नहीं हैं। ध्यान रहे कि विपक्ष लगातार उनकी कम उपस्थिति और सवालों की संख्या शून्य होने पर तंज कस रहा है, जबकि सत्ता पक्ष और सभापति ने उनके कानूनी अनुभव और गरिमापूर्ण उपस्थिति की सराहना की है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा से रिटायर होने के बाद रंजन गोगोई भविष्य में किसी अन्य सरकारी या कानूनी पद की जिम्मेदारी संभालते हैं या फिर पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेते हैं। उनका 6 साल का यह कार्यकाल इस बात की बहस को फिर से तेज करता है कि मनोनीत सदस्यों (खासकर पूर्व जजों) की सदन में क्या भूमिका होनी चाहिए और उनके विधायी कामकाज का आकलन कैसे किया जाना चाहिए।
Updated on:
16 Mar 2026 06:24 pm
Published on:
16 Mar 2026 06:20 pm
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