
RSS Yathindra Siddaramaiah: कर्नाटक की राजनीति में RSS को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कर्नाटक के मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने RSS को हज़ार सिर वाला जहरीला सांप तक कह दिया। यतींद्र सिद्धारमैया ने RSS पर जातिवाद, सांप्रदायिकता और मनुवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी विचारधारा पर रोक नहीं लगी, तो समाज और देश को नुकसान हो सकता है।
मामला यहीं नहीं रुका। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी विरोध जारी रखने की अपील की। वहीं, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने RSS की कानूनी स्थिति और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े किए।
इस विवाद के बीच कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी RSS पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने RSS की कानूनी स्थिति को लेकर सवाल किया। उनका कहना था कि मुद्दा RSS के अस्तित्व का नहीं है। असली सवाल उसकी कानूनी पहचान और जवाबदेही का है।
प्रियांक खड़गे ने पूछा कि RSS किस कानूनी ढांचे के तहत काम करता है। उसकी संपत्तियों का मालिक कौन है? बैंक खाते किसके नाम पर हैं? उसे मिलने वाले चंदे का हिसाब कैसे रखा जाता है? उन्होंने ऑडिटेड खातों और कानूनी खुलासों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि एक बड़े और प्रभावशाली संगठन से पारदर्शिता की उम्मीद स्वाभाविक है।
RSS को लेकर कांग्रेस नेताओं के इन बयानों ने कर्नाटक की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ यतींद्र सिद्धारमैया ने RSS की विचारधारा पर निशाना साधा है। दूसरी तरफ प्रियांक खड़गे ने संगठन की कानूनी स्थिति और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
सिद्धारमैया ने साफ कहा कि सवाल RSS के मौजूद होने का नहीं है। सवाल यह है कि वह किस कानून और कानूनी पहचान के तहत काम करता है। अब देखना होगा कि RSS और BJP की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब आता है। फिलहाल, कर्नाटक में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ता नजर आ रहा है।
बता दें इससे पहले BJP के स्टेट प्रेसिडेंट बी.वाई. विजयेंद्र ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर चीफ मिनिस्टर डी.के. शिवकुमार और प्रियांक खड़गे में सच में हिम्मत है, तो उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए और RSS पर बैन लगाना चाहिए। देखिए, उन्हें समझना चाहिए कि पीछे हटकर वे RSS को कंट्रोल नहीं कर सकते। RSS का इस देश की सेवा करने का 100 साल का इतिहास है। सिर्फ RSS के रजिस्ट्रेशन न होने का मुद्दा उठाने के लिए, वे सरकारी ताकत का इस्तेमाल करके इसे रोक नहीं सकते।