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आखिर कैसे प्रतिबंधों के बावजूद भारत पहुंच रहा है रूसी तेल? सामने आए 2 रास्ते और समुद्र में तेल ट्रांसफर का सीक्रेट तरीका

Russian Oil Import India: प्रतिबंधों के बावजूद भारत तक कैसे पहुंच रहा है रूसी तेल? जानें बाल्टिक और काला सागर के दो प्रमुख रास्ते, समुद्र में शिप-टू-शिप ट्रांसफर का तरीका और रूस से बढ़ते तेल आयात की पूरी कहानी।
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Apr 01, 2026
Russian Oil Import India
Russian Oil Import India (Image: Gemini)

Russian Oil Import India: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भी भारत लगातार रूस से कच्चा तेल आयात कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि आखिर प्रतिबंधों के बावजूद यह तेल भारत तक पहुंच कैसे रहा है। द प्रिंट समेत विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस से भारत तक तेल पहुंचाने के दो मुख्य रास्ते हैं, जबकि समुद्र में होने वाला शिप-टू-शिप ट्रांसफर इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस का करीब 150 मिलियन बैरल कच्चा तेल समुद्र में ही फंसा रह गया था, क्योंकि यह पहले से लोड था और खरीदारों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।

भारत में क्यों बढ़ा रूसी तेल आयात?

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत ने रूस से तेल आयात को बनाए रखा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच रूस रियायती दरों पर तेल उपलब्ध करा रहा है, जिससे यह सौदा भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद बना हुआ है।

पहला रास्ता: बाल्टिक सागर से भारत

रूस का सबसे बड़ा तेल निर्यात मार्ग बाल्टिक सागर के प्रिमोर्स्क और उस्त-लूगा बंदरगाहों से होकर गुजरता है। यहां से निकलने वाले टैंकर उत्तरी सागर, जिब्राल्टर जलडमरूमध्य, भूमध्य सागर, स्वेज नहर और लाल सागर होते हुए अरब सागर के जरिए भारत पहुंचते हैं। इस पूरे सफर में आमतौर पर 25 से 30 दिन का समय लगता है और यही रास्ता भारत के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

दूसरा रास्ता: काला सागर का रूट

रूस का दूसरा प्रमुख मार्ग काला सागर स्थित नोवोरोसिस्क टर्मिनल से शुरू होता है। यहां से टैंकर तुर्की जलडमरूमध्य पार कर भूमध्य सागर में प्रवेश करते हैं और फिर स्वेज नहर व लाल सागर होते हुए भारत पहुंचते हैं। इस रूट से भारत तक तेल पहुंचने में लगभग 15 से 20 दिन लगते हैं और दूरी करीब 4200 नॉटिकल मील होती है।

समुद्र में तेल ट्रांसफर का सीक्रेट तरीका

पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस और उसके खरीदार देश समुद्र में शिप-टू-शिप ट्रांसफर का सहारा लेते हैं। इस प्रक्रिया में तेल को पहले छोटे टैंकरों में भरा जाता है और फिर खुले समुद्र में, अक्सर निगरानी से दूर इलाकों में, इसे दूसरे जहाज में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसके बाद यह तेल ऐसे टैंकरों के जरिए आगे भेजा जाता है, जिन पर सीधे तौर पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं होता। यही वजह है कि प्रतिबंधों के बावजूद आपूर्ति जारी रहती है।

कितना तेल खरीद रहा है भारत?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात करीब 1.9 मिलियन बैरल प्रति दिन (अनुमानित) तक पहुंच गया, जो कुल आयात का लगभग 45 प्रतिशत है।

Updated on:
01 Apr 2026 10:07 pm
Published on:
01 Apr 2026 10:07 pm