Justice Ujjal Bhuyan Constitutional Morality: जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने अपनी बेटी की मुस्लिम दोस्त की घटना बताई, जिसे साउथ दिल्ली में रहने के लिए घर नहीं मिला क्योंकि वह मुस्लिम है।
SC Judge Justice Ujjal Bhuyan: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने एक सेमिनार में समाज में व्याप्त धार्मिक और जातिगत भेदभाव का दिल दहला देने वाला उदाहरण दिया। उन्होंने अपनी बेटी की मुस्लिम दोस्त की घटना बताई, जिसे साउथ दिल्ली में रहने के लिए घर नहीं मिला क्योंकि वह मुस्लिम है। जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारत के संविधान में समानता और धर्मनिरपेक्षता के मूल्य हैं, लेकिन समाज की हकीकत इनसे बहुत दूर है।
तेलंगाना जजेस एसोसिएशन और तेलंगाना स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी द्वारा आयोजित सेमिनार में 'संवैधानिक नैतिकता और जिला न्यायपालिका की भूमिका' विषय पर बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि उनकी बेटी की दोस्त नोएडा के एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रही है। वह दिल्ली में रहने की जगह ढूंढ रही थी। उसने साउथ दिल्ली में एक वर्किंग विमेन हॉस्टल चलाने वाली मकान मालकिन से संपर्क किया। मालकिन ने उसका नाम पूछा। नाम सुनकर थोड़ा अस्पष्ट लगा तो सरनेम पूछा। सरनेम से मुस्लिम पहचान पता चलते ही मालकिन ने साफ कह दिया, 'रहने की जगह उपलब्ध नहीं है, आप कहीं और ढूंढ लें।'
जस्टिस भुइयां ने इसे समाज की गहरी दरारों का उदाहरण बताते हुए कहा, 'यह सिर्फ एक उदाहरण है। ये पहाड़ की चोटी है जो दिखाती है कि समाज में कितनी गहरी दरारें हैं। हमारे गणतंत्र के 75 साल बाद भी हम संवैधानिक नैतिकता के बेंचमार्क से कितने दूर हैं।'
उन्होंने एक और घटना का जिक्र किया जहां ओडिशा में मिड-डे मील स्कीम में दलित कुक द्वारा बनाया खाना खाने से माता-पिता ने बच्चों को रोका। उन्होंने कहा कि ये उदाहरण समाज में व्याप्त पूर्वाग्रहों को उजागर करते हैं, जहां संवैधानिक मूल्य कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
जस्टिस भुइयां ने जोर देकर कहा कि संवैधानिक नैतिकता सिर्फ संस्थानों के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए है। समाज को इन दरारों को भरने की जरूरत है ताकि असली समानता हासिल हो। यह बयान देश में बढ़ते धार्मिक भेदभाव और हाउसिंग डिस्क्रिमिनेशन के मुद्दे पर नई बहस छेड़ रहा है।