
आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी का हाथ पकड़ लिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सत्तारूढ़ दल BJP की उच्च सदन में सदस्य संख्या बढ़कर 113 हो गई है। सदस्य संख्या में बढ़ोतरी से सत्ता समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन भाजपा को राज्यसभा में महत्वपूर्ण विधेयक पारित करने में अन्य दलों पर निर्भरता जरूर कम होगी।
AAP के सांसदों का बीजेपी में विलह का यह पहला राजनीतिक उदाहरण नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में अन्य दलों के एक गुट का या पूरी पार्टी के विधायक/संसदीय दल का बीजेपी में विलय का यह पहला उदाहरण नहीं है। इसकी लंबी फेहरिस्त है, जिससे दूसरे दल टूटते गए और भाजपा की सरकारें और कुनबा बढ़ता गया।