
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के 42 साल बाद एक बार फिर 1984 की घटना चर्चा में है। उनकी हत्या करने वाले बेअंत सिंह की पुण्यतिथि पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और सोशल मीडिया पर लिखा, 'भाई बेअंत सिंह जी के शहादत दिवस पर करोड़ों प्रणाम।' अपने वीडियो संदेश में SGPC ने ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिक्र करते हुए इंदिरा गांधी की हत्या से जुड़ी घटनाओं को भी याद किया।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। इसमें कमेटी ने बेअंत सिंह को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। पोस्ट में लिखा गया, 'शहीद भाई बेअंत सिंह जी के शहादत दिवस पर हम उन्हें करोड़ों प्रणाम करते हैं।' SGPC ने इस मौके पर एक वीडियो संदेश भी जारी किया, जिसमें जून 1984 में अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब में भारतीय सेना की ओर से चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिक्र किया।
SGPC के वीडियो संदेश में कहा गया कि सचखंड श्री हरमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय के लिए आध्यात्मिकता, श्रद्धा और शक्ति के प्रमुख केंद्र हैं। कमेटी के अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर जून 1984 में भारतीय सेना ने श्री दरबार साहिब में सैन्य कार्रवाई की थी। वीडियो में इस कार्रवाई को लेकर कमेटी ने अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि इससे हरमंदिर साहिब की पवित्रता और गरिमा को ठेस पहुंची थी।
वीडियो संदेश में SGPC ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद की घटनाओं का भी जिक्र किया। कमेटी ने बताया कि भाई बेअंत सिंह, सतवंत सिंह और भाई केहर सिंह ने हरमंदिर साहिब के सम्मान और पवित्रता के मुद्दे पर बदला लेने का फैसला किया था। SGPC के अनुसार, इसी के तहत 31 अक्टूबर 1984 को बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों की जवाबी कार्रवाई में बेअंत सिंह मारे गए। कमेटी ने अपने संदेश में उनकी मौत को शहादत बताया।
31 अक्टूबर 1984 को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इस वारदात को अंजाम देने वाले बेअंत सिंह और सतवंत सिंह उस समय उनके सुरक्षा दस्ते में तैनात थे। हत्या के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने बेअंत सिंह को मौके पर ही गोली मार दी थी। वहीं, सतवंत सिंह को इस मामले में दोषी ठहराया गया और बाद में फांसी दे दी गई। भाई केहर सिंह को भी इस हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था और उन्हें फांसी की सजा दी गई थी।