शाहपुर कंडी बांध के पूरा होने से रावी नदी का पानी अब पाकिस्तान नहीं जाएगा। जानिए सिंधु जल संधि और इस परियोजना का असर।
Shahpur Kandi Dam: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से बहते पानी की राजनीति अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर निर्माणाधीन शाहपुर कंडी बांध परियोजना अपने अंतिम चरण में है। इस बांध के चालू होने के बाद रावी नदी का वह पानी, जो अब तक पाकिस्तान की ओर बहता था, पूरी तरह रोक लिया जाएगा और इसका उपयोग जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सूखी भूमि को सींचने में किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने सोमवार को बताया कि बांध का कार्य 31 मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है। विशेष रूप से यह परियोजना कठुआ और सांबा जिलों के लिए जीवनरेखा साबित होगी।
शाहपुर कंडी बांध केवल जल संचयन का साधन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की 32,173 हेक्टेयर भूमि और पंजाब की लगभग 5,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव होगी। केंद्रीय सरकार ने सिंचाई घटक के लिए 485.38 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है। बांध के पूरा होने से न केवल कृषि को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में विद्युत उत्पादन और कृषि विकास में भी नई दिशा मिलेगी।
1960 की सिंधु जल संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों पर भारत का पूर्ण अधिकार है। बावजूद इसके, तकनीकी बाधाओं और बांध न होने के कारण रावी का अधिकांश पानी पाकिस्तान चला जाता था। पूर्व सिंचाई मंत्री ताज मोहिद्दीन के अनुसार, शाहपुर कंडी परियोजना पूरी तरह से सिंधु जल संधि के दायरे से बाहर है, क्योंकि रावी, सतलुज और ब्यास पर भारत का विशेष अधिकार है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति कड़ा रुख अपनाया है।
भारत ने संधि को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया और डेटा शेयरिंग भी बंद कर दी है। इसके साथ ही अब भारत पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) के पानी के अधिकतम उपयोग की संभावनाओं की भी तलाश कर रहा है। जम्मू-कश्मीर के विधायक डॉ. रामेश्वर सिंह का कहना है कि परियोजना के पूर्ण होने के बाद पानी पाकिस्तान नहीं जाएगा, बल्कि कठुआ क्षेत्र की उपजाऊ भूमि को हराभरा करेगा।
अधिकारियों का मानना है कि यह कदम केवल कृषि के लिए नहीं, बल्कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ रणनीतिक और कूटनीतिक दबाव का भी हिस्सा है। पाकिस्तान पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है, और भारत द्वारा अपने हिस्से का पूरा पानी उपयोग करने से वहां निचले इलाकों में पानी की कमी होने की संभावना है।