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‘गांव बिकाऊ है’ के बैनर से हिली महाराष्ट्र की सियासत, किसानों के बीच पहुंचे शरद पवार, 50 लाख की मदद

Sharad Pawar: 'गांव बिकाऊ है' का बैनर लगाने वाले महाराष्ट्र के तुलसी गांव पहुंचे शरद पवार ने किसानों से मुलाकात कर सूखे और पानी की किल्लत का जायजा लिया। उन्होंने सोलापुर के सूखा प्रभावित इलाकों के लिए 50 लाख रुपए की मदद दी।
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Updated: 1 Nov 2026, 8:56 PM IST
Sharad Pawar
राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार। फाइल फोटो- पत्रिका

Tulshi Village: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में सूखे की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार ने तुलसी गांव के किसानों को 50 लाख रुपए की मदद देने की घोषणा की। इसी गांव के लोगों ने पानी की गंभीर कमी से परेशान होकर कुछ दिन पहले ‘गांव बिकाऊ है’ के बैनर लगाए थे। पवार ने गांव पहुंचकर किसानों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। साथ ही भरोसा दिलाया कि वे सरकार के सामने भी किसानों की परेशानी उठाएंगे।

सोलापुर जिले से दौरे की शुरुआत

शरद पवार ने अपने सूखा दौरे की शुरुआत सोलापुर जिले से की। उन्होंने माढा तालुका के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। माढा वही लोकसभा क्षेत्र है, जहां से उन्होंने चुनाव लड़ा था। इस दौरान वे खेतों में किसानों के बीच पहुंचे और पानी की कमी से पैदा हुए हालात की जानकारी ली। पवार ने 1972 के सूखे का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वे सोलापुर जिले के पालकमंत्री थे। उस दौरान भी जिले में गंभीर सूखे की स्थिति थी और सरकार की ओर से किसानों को हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास किया गया था।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे

उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भी किसानों की मदद जरूरी है। इसी क्रम में उन्होंने सोलापुर जिले के सूखा प्रभावित क्षेत्र के लिए 50 लाख रुपए का चेक सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटील को सौंपा। पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बारामती आएंगे, तब सांसद सुप्रिया सुले और धैर्यशील मोहिते-पाटील को किसानों की समस्याएं उनके सामने रखने के लिए समय दिलाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मराठवाड़ा का सूखा दौरा पूरा करने के बाद वे मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। करीब एक महीने पहले ही उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सूखे से निपटने के लिए जरूरी उपायों की जानकारी दी थी।

सरकारी मदद की उम्मीद बंधी

गौरतलब है कि माढा तालुका के तुलसी गांव में पानी की भारी कमी के चलते ग्रामीणों ने गांव बेचने का बैनर लगाया था। इस मामले ने पूरे महाराष्ट्र का ध्यान खींचा था। ग्रामीणों का कहना था कि पानी के संकट के कारण गांव में रहना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद जिला कलक्टर ने गांव पहुंचकर लोगों से बातचीत की और मदद का भरोसा दिया था। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने बैनर हटा दिया था। अब शरद पवार के दौरे से ग्रामीणों को सूखे की समस्या के समाधान और सरकारी मदद की उम्मीद बंधी है।

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1 Nov 2026, 8:56 PM IST
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