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‘गलत नहीं हूं तो झुकूं क्यों?’ थरूर के तेवर देख कांग्रेस नेतृत्व परेशान, राहुल गांधी के साथ खींचतान की असली वजह आई सामने

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर अपने रुख को लेकर माफी मांगने या पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया है।
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Shashi Tharoor
शशि थरूर (Photo-X)

शशि थरूर और राहुल गांधी में जारी खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थरूर एक बार फिर सुर्खियों में छाए हुए है। कांग्रेस की अहम बैठकों में शामिल नहीं होने के बाद सियासी अटकलों का बाजार गरम है। इस पूरे मामले में अब शशि थरूर का बयान सामने आया है। कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपने रुख को लेकर वे अडिग हैं, जैसे कि पाकिस्तान के खिलाफ बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कदमों का समर्थन करना, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने का तरीका भी शामिल है।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कही ये बात

थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में पार्टी के घोषित रुख का कभी उल्लंघन नहीं किया और सैद्धांतिक रूप से उनका एकमात्र सार्वजनिक मतभेद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर था। यह जानकारी कोझिकोड और नई दिल्ली से दी है। यह बयान तब आया है जब उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित केरल चुनाव रणनीति पर उच्च स्तरीय बैठक में भाग नहीं लिया।

जानें आलाकमान ने क्या कहा

जहां कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि थरूर की अनुपस्थिति केरल साहित्य महोत्सव (केएलएफ) में पूर्व निर्धारित प्रतिबद्धताओं के कारण थी। वहीं सूत्रों का कहना है कि चार बार के सांसद कोच्चि में हाल ही में हुए एक कार्यक्रम में पार्टी नेता राहुल गांधी द्वारा कथित तौर पर नजरअंदाज किए जाने से गहरा अपमान महसूस कर रहे थे।

पार्टी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर थरूर बोले, 'भारत सर्वोपरि'

कोझिकोड में आयोजित साहित्य उत्सव में आध्यात्मिक गुरु श्री नारायण गुरु पर अपनी पुस्तक के विषय पर चर्चा के दौरान, थरूर से कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे मतभेद के बारे में पूछा गया। उन्होंने किसी विशिष्ट घटना का जिक्र नहीं किया, लेकिन कहा कि पिछले साल कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकी शिविरों के खिलाफ कार्रवाई की वकालत करने वाले अपने लेखन और भाषणों पर वे आज भी कायम हैं। उनका कहना है कि जब कोई गलती नहीं की है तो झुकने का कोई सवाल ही नहीं है।

विदेश नीति को लेकर कांग्रेस ने की कड़ी आलोचना

थरूर ने जवाहरलाल नेहरू के सवाल भारत के मरने पर कौन जीवित रहेगा? का हवाला देते हुए तर्क दिया कि देश की सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, जब भारत दांव पर हो… तो भारत सर्वोपरि है। उनकी विदेश नीति को लेकर पहले भी कांग्रेस के भीतर से कड़ी आलोचना हुई है क्योंकि यह पार्टी की लाइन से अलग है, जिसने सुरक्षा में चूक और ऑपरेशन सिंदूर के बाद जिस तरह से युद्धविराम हुआ, उसके लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है।

Updated on:
24 Jan 2026 05:02 pm
Published on:
24 Jan 2026 05:02 pm