
UBT Mps shiv sena: देश की राजनीतिक पार्टियों में बगावत और उनके टूटने पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है। इसके लिए उन्होंने भाजपा पर तीखा प्रहार किया है। राउत ने एक पोस्ट में कहा, 'आम आदमी पार्टी टूट गई, पहले शिवसेना में फूट पड़ी, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में फूट पड़ी, और अब तृणमूल कांग्रेस के बाद शिवसेना को फिर से तोड़ने की कोशिश की जा रही है। '
उन्होंने सवाल उठाया, इस देश में ऐसा क्यों हो रहा है, और संसद में इसकी क्या जरूरत है? आपके पास पहले से ही पूर्ण बहुमत है। राउत ने पूछा, क्या यह लत बन गई है? हर पार्टी को तोड़ना, यह किस तरह का जुनून है? यह लोकतंत्र है; देश संविधान पर चलता है। थोड़ा संयम बरतना चाहिए।
टीएमसी की बागी सांसद रचना बनर्जी कहती हैं, 'उनके (ममता बनर्जी) खिलाफ कभी कोई बगावत नहीं हो सकती। दीदी के साथ हमारा बहुत पुराना रिश्ता है और यह रिश्ता हमेशा वैसा ही रहेगा। उनके प्रति हमारा सम्मान हमेशा बना रहेगा। लेकिन एक बात यह है कि हमें दीदी की वजह से वोट मिले। यह सही है। हमें दीदी की वजह से वोट मिले, क्योंकि दीदी खुद तृणमूल कांग्रेस की पहचान और प्रतीक हैं। तृणमूल कांग्रेस में लोग जिस चेहरे को पहचानते और भरोसा करते हैं, वह दीदी का चेहरा है और हम सभी उनका बहुत सम्मान करते हैं।
बनर्जी ने कहा, लोगों ने दीदी को देखकर वोट दिया और उन्होंने रचना बनर्जी को वोट इसलिए नहीं दिया क्योंकि वे मेरे चेहरे से प्रभावित हुए थे, बल्कि इसलिए दिया क्योंकि उन्हें विश्वास था कि मैं उनके लिए काम कर पाऊंगी। दीदी इसके पीछे का चेहरा थीं और उसके बाद उन्होंने इस उम्मीद के साथ हमें वोट दिया कि मैं जनता और अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए अच्छा काम करूंगी। बिल्कुल भी कोई नाराजगी नहीं थी।
उन्होंने कहा, मुझे लगा कि अगर केंद्र सरकार और राज्य सरकार एक ही दल के हाथों में होती, तो काम करवाना बहुत आसान हो जाता है, ऐसा हमने पिछले 15 सालों में नहीं देखा है। लोग चाहते हैं कि हम उनके लिए कुछ करें, उनके लिए अच्छा काम करें। और ऐसा करने के लिए केंद्र सरकार का सहयोग बहुत जरूरी है। इसलिए, दीदी के प्रति सम्मान के साथ, मुझे कई बार उनके साथ रहते हुए ऐसा लगा कि हमारे काम में कई बार रुकावटें डाली गईं और हम वो काम नहीं कर पाए जो हम असल में करना चाहते थे।
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुूए कहा है कि पेपर लीक एक बड़ा कारोबार बन चुका है और इसकी कमाई ऊपर तक पहुंचती है। उनका आरोप है कि मोदी सरकार की पेपर लीक रोकने की कोई नीयत नहीं है, अगर सरकार ने पेपर लीक का यह धंधा बंद कर दिया, तो फिर विधायकों और सांसदों को खरीदने के लिए पैसे कहां से आएंगे। यानि उन्होंने दल के कमजोर होने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है।