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200 कार्यकर्ताओं पर विचार के बाद तय हुआ था नितिन नवीन का नाम, शिवराज की किताब ‘अपनापन’ में सामने आई बात

शिवराज सिंह चौहान की आने वाली किताब ‘अपनापन’ में पीएम नरेंद्र मोदी की कार्यशैली, फैसलों और नेतृत्व से जुड़े कई दिलचस्प किस्सों का जिक्र किया गया है। पुस्तक का विमोचन 26 मई को दिल्ली में होगा, जिसमें मोदी के साथ शिवराज के तीन दशक पुराने अनुभव साझा किए गए हैं।

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May 22, 2026
Shivraj Singh chauhan Book (AI Image)

Shivraj Singh chauhan Book: भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नितिन नवीन का चौंकाने वाला चयन कुछ नेताओं की मर्जी से नहीं बल्कि एक प्रक्रिया से तय हुआ। इसका खुलासा केंद्रीय कृषि कल्याण मंत्री शिवराज सिंह ने अपनी आने वाली पुस्तक 'अपनापन: नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव' में किया है। मोदी के साथ अपने तीन दशक के रिश्तों व अनुभवों पर आधारित इस किताब में शिवराज ने बताया कि पार्टी में बहुत पहले ही तय कर लिया था कि वैचारिक निष्ठा वाला और 50 वर्ष से कम आयु का कार्यकर्ता नया अध्यक्ष होगा।

इसके लिए पूरे भारत से नामांकन आमंत्रित किए गए थे, और 200 से अधिक नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया था, उनमें से नौ युवाओं की छोटी सूची बनी और अंतत: पृष्ठभूमि और कार्यानुभव के आधार पर नितिन नवीन का चयन हुआ। शिवराज ने लिखा कि यह पीएम मोदी की नेतृत्व शैली को उजागर करता है, जो पारदर्शिता, सहभागिता और निष्पक्षता पर आधारित है।

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शिवराज की इस पुस्तक का विमोचन 26 मई को दिल्ली में पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा करेंगे। पुस्तक में मोदी के नीतिगत फैसलों व कार्यशैली के अनसुने पहलुओं को उजागर किया गया है, जिन्हें शिवराज ने बेहद करीब से देखा है।

पहलगाम हमला और पीएम का दृढ़ संकल्प

शिवराज सिंह ने पुस्तक में 22 अप्रेल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद 30 अप्रेल को हुई कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी के चेहरे पर न शिकन थी, न आक्रोश; वे पूरी तरह शांत-गंभीर थे। बैठक में उन्होंने दृढ़ आवाज में कहा, ‘इस बार का ऑपरेशन सर्जिकल और एयरस्ट्राइक से अलग होगा। देश को चोट पहुंचाने वाले दुनिया के किसी भी कोने में हों, उन्हें और उनके आकाओं को बख्शा नहीं जाएगा।’

कैबिनेट में अलग अनुभव, अच्छे श्रोता

चौहान ने अपनी किताब में लिखा है कि मोदी की कैबिनेट बैठक औपचारिक नहीं होती जहां लोग सिर्फ सहमति में सिर हिलाते हों। मोदी कैबिनेट का अनुभव अलग है। वह हर सदस्य खुलकर अपनी राय देने को प्रोत्साहित करते हैं। मैंने कई बार देखा है कि जब कोई मंत्री कोई नया दृष्टिकोण या विचार प्रस्तावित करता है, तो मोदी बिना किसी झिझक के उस प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए रोक देते हैं, भले ही उसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए अंतिम रूप दे दिया गया हो। वह ज्यादा सुनते हैं और कम बोलते हैं। मैंने पहले कभी इतना अच्छा श्रोता नहीं देखा।

राष्ट्रीय हित और किसानों की चिंता

पुस्तक में अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान टैरिफ विवाद से जुड़े एक संस्मरण का भी उल्लेख है। शिवराज ने लिखा कि कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा था कि राष्ट्रीय और किसानों के हितों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।ऐसा फैसला नहीं होगा जिससे देश का अन्नदाता कमजोर पड़े।

छोटी-छोटी डिटेल व स्पष्ट जवाब

शिवराज ने पुस्तक में लिखा कि मोदी की कार्यशैली तीन शब्दों में गहराई से विचार, सटीकता और सफलता की है। वह छोटी-छोटी डिटेल लेते हैं, वह देखते हैं. जो अधिकतर लोग अनदेखा कर देते हैं। पूछते हैं कि क्या योजना का अंतिम चरण सफल हुआ? क्या नागरिक तक योजना की जानकारी पहुंची ? मोबाइल पर फॉर्म कैसा दिखता है? हेल्पलाइन पर अधूरी शिकायत दर्ज तो नहीं रह गई? वह अस्पष्ट वाक्य स्वीकार नहीं करते, जैसे- 'जितनी जल्दी हो सके।' उनके सवाल होते हैं- 'किस तारीख तक ? कौन जिम्मेदार है?' वह सच्चे आंकड़े चाहते हैं।

फीड बैक का ध्यान, कमियां भी बताते

शिवराज ने कहा कि मोदी का किसी भी कार्यक्रम या योजना पर अमल पर फीड बैक का अपना मैकेनिज्म है। वह फीड बैक को विशेष तरजीह देते हैं। इंदौर में 2023 में प्रवासी भारतीय दिवस के समापन के बाद पीएम का फोन आया और पूछा कि इसे कैसी प्रतिक्रिया मिली। उस समय सीएम चौहान ने अच्छा कार्यक्रम व अनुभव बताया तो मोदी ने फीड बैक तंत्र के बारे में पूछा। साथ ही बताया कि मंच पर तीन राष्ट्रपतियों के मौजूद होने के बावजूद चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लंबे भाषण दिए जो छोटे होने चाहिए थे।

परिवार की तरह चिंता करने वाले अभिवावक

शिवराज ने लिखा कि 2020 में जब मुझे कोविड-19 हुआ और मैं अस्पताल में भर्ती था। अचानक मोदीजी का फोन आया- मेरा हालचाल पूछने के लिए। मुझे उनकी आवाज आज भी याद है- शांत, भरोसे और करुणा से भरी हुई। वे बार- बार पूछते रहे कि 'ऑक्सीजन लेवल ठीक है? क्या परिवार सुरक्षित है? आप दवाइयां समय पर ले रहे हो ?' तचीत में मुझे बस यही लगा कि वे एक बड़े भाई की तरह अपने छोटे भाई का हालचाल पूछ रहे हैं। शिवराज ने बताया कि 2019 में उनके पिता का निधन हुआ तो पहला सांत्वना कॉल मोदीजी का आया था।

राजस्थान में सभा में पहचाना पुराने कार्यकर्ता को

शिवराज ने लिखा कि मुझे राजस्थान के देवगढ़ की सभा याद है। पीएम मोदी ने जैसे ही उन्होंने बोलना आरंभ किया, उनकी नजर एक चिर-परिचित शख्सियत 95 वर्षीय धर्मचंद देरासरियाजी पर पड़ी, जो जनसंघ के दौर के एक वरिष्ठ नेता थे। यह देख मोदीजी की आवाज में एक व्याकुलता आ गई। वह बीच में ही रुके और कहा, 'मैंने यहा बैठे-बैठे श्रद्धेय देरासरियाजी को देखा, इस आयु में शायद जीवन के छह दशक देरासरियाजी ने इस विचार के लिए खपा दिए और एक कार्यकर्ता के रूप में नीचे बैठकर हमको आशीर्वाद दे रहे हैं।

जवाबदेही के बिना घोषणाएं बेकार

शिवराज लिखते हैं कि उन्होंने पीएम मोदी से जो सबसे बड़ा सबक सीखा, वह है उत्तरदायित्व। मोदी केवल मंचों से घोषणाएं करने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि वे हर योजना की ग्राउंड रिपोर्ट खुद खंगालते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सरकारी योजना का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक अनिवार्य रूप से पहुंचे। चौहान ने पुस्तक में मोदी काे ऋषि ,समाज सुधारक, तपस्वी, महापुरुष जैसे शब्दों से संबोधित किया है और कहा है कि उनके कार्यकाल को भारत में 'स्वर्ण अध्याय' के रूप में वर्णित किया जा सकता है।

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