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चीन-पाक सीमा पर दिखेगी भारत की फौलादी ताकत, बटन दबाते ही तबाही मचा देगी ‘अग्नि-1’, क्या है इसकी खास बात?

Agni-1:भारत ने ओडिशा के चांदीपुर से शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-1' का सफल परीक्षण किया है। स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में हुए इस टेस्ट ने सभी तकनीकी मानकों को पूरा कर चीन-पाक की टेंशन बढ़ा दी है।

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भारत

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MI Zahir

May 22, 2026

Ballistic Missile ‘Agni-1’ test-launched

भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-1' का सफल परीक्षण किया । ( फोटो: ANI)

Indian Defence Power: भारत ने आसमान में एक बार फिर अपनी फौलादी ताकत दिखा कर दुश्मन देशों को थर्राने की तैयारी कर ली है। भारतीय सेना की सामरिक ताकत में आज एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-1' का एक और सफल परीक्षण किया गया है। सामरिक बल कमान की ओर से किए गए इस सैन्य अभ्यास ने मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को पूरी तरह से सही साबित किया है। यह सफल लॉन्चिंग यह दर्शाती है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर कितना सतर्क और आत्मनिर्भर है।

डीआरडीओ और भारत की डिफेंस पावर : एक नजर

इस पूरी कामयाबी के पीछे रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन की सालों की कड़ी मेहनत है। डीआरडीओ ने भारत की सैन्य ताकत को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है जहां आज दुनिया हमारी तकनीक का लोहा मानती है। 'अग्नि-1' मिसाइल इस बात का सबूत है कि भारत तकनीक के मामले में अब किसी भी पश्चिमी देश से पीछे नहीं है। यह स्वदेशी तकनीक न केवल हमारी सेना का मनोबल बढ़ाती है बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करती है।

मिसाइलमैन का सपना और भारत का मिसाइल सफर

जब भी हम अग्नि सीरीज की बात करते हैं, तो भारत के पूर्व राष्ट्रपति और 'मिसाइलमैन' डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। कलाम साहब के विजन और इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत ही अग्नि मिसाइलों की नींव रखी गई थी। आज भारत के पास अग्नि-1 से लेकर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 तक की पूरी सीरीज है। भारत ने पृथ्वी, नाग, त्रिशूल और ब्रह्मोस जैसी एक से बढ़कर एक मिसाइलें विकसित कर दुनिया को अपनी मारक क्षमता दिखाई है।

पाकिस्तान और चीन के लिए क्यों है बड़ा खतरा ?

'अग्नि-1' मिसाइल भले ही शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल हो, लेकिन इसकी सटीक मारक क्षमता और पलक झपकते ही तबाही मचाने की ताकत पड़ोसी मुल्कों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। यह मिसाइल परमाणु हथियारों को ले जाने में पूरी तरह सक्षम है और इसे बेहद कम समय में सड़क या रेल मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है। चीन और पाकिस्तान की हरकतों को देखते हुए यह मिसाइल भारत के लिए 'डिटेरेंस' यानी प्रतिरोधक का काम करती है। यह सीधे तौर पर संदेश है कि अगर भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ हुआ, तो अंजाम बेहद घातक होगा। यह सदाबहार तकनीक भारत की सुरक्षा कवच को हमेशा मजबूत रखेगी।

सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 'अग्नि-1' का यह सफल परीक्षण भारत की 'नो फर्स्ट यूज' (पहले परमाणु हमला न करने) की नीति के तहत अपनी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। रक्षा मंत्री ने इस सफलता पर सामरिक बल कमान और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह देश की सैन्य तैयारियों की विश्वसनीयता को साबित करता है।

अग्नि सीरीज की अन्य मिसाइलों के रूटीन यूजर ट्रायल की भी योजना

इस सफल परीक्षण के बाद अब सेना इस मिसाइल के अपग्रेडेड वर्जन और इसके नाइट-ट्रायल (रात के समय परीक्षण) पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। आने वाले दिनों में अग्नि सीरीज की अन्य मिसाइलों के रूटीन यूजर ट्रायल की भी योजना है, जिससे देश की तीनों सेनाओं की मारक क्षमता को हर परिस्थिति में परखा जा सके।

भारतीय नौसेना और हवाई सुरक्षा तंत्र पूरी तरह अलर्ट पर

बहरहाल,इस परीक्षण का एक पहलू यह भी है कि जब भी भारत हिंद महासागर या ओडिशा तट से मिसाइल टेस्टिंग करता है, तो क्षेत्र में विदेशी जासूसी जहाजों (विशेषकर चीनी ट्रैकिंग जहाजों) की गतिविधि बढ़ जाती है। इस परीक्षण के दौरान भी भारतीय नौसेना और हवाई सुरक्षा तंत्र पूरी तरह अलर्ट पर थे ताकि परीक्षण की गोपनीयता और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।