राष्ट्रीय

SIR को लेकर पूर्व जज का बड़ा बयान, बोले- कांग्रेस राज में भी 8 बार हो चुका है, नाम कटा है तो कोर्ट जाएं

SIR पर केरल हाई कोर्ट के पूर्व जज पीएन रविंद्रन ने कहा कि यह प्रक्रिया पहले भी आठ बार हो चुकी है। उन्होंने वोटर लिस्ट से नाम कटने पर कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही।
2 min read
• •
Oct 07, 2026
Kerala Judge
केरल हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पीएन रविंद्रन। (फोटो- ANI)

केरल हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पीएन रविंद्रन ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रही बहस के बीच बड़ा बयान दिया है।

उन्होंने कहा है कि एसआईआर का मकसद मतदाता सूची को साफ और भरोसेमंद बनाना है। उन्होंने कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है। देश में पहले भी आठ बार ऐसा पुनरीक्षण हो चुका है और उस समय कांग्रेस की सरकार भी सत्ता में थी।

'SIR पहली बार नहीं हो रहा'

जस्टिस पी.एन. रविंद्रन ने कहा कि जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, तब भी SIR हुआ था। लेकिन इसका यह मतलब नहीं था कि उस समय कांग्रेस ने चुनाव आयोग को नियंत्रित किया था। उन्होंने आगे कहा- SIR एक ऐसी प्रक्रिया है, जो कई वर्षों से चुनाव व्यवस्था का हिस्सा रही है।

पूर्व जज ने इस बहस को चुनाव आयोग की भूमिका से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव के लिए सही और वैध मतदाता सूची बेहद जरूरी है। अगर वोटर लिस्ट में गलत नाम शामिल हैं या पात्र मतदाताओं के नाम नहीं हैं, तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं।

साफ वोटर लिस्ट चुनाव के लिए जरूरी

जस्टिस रविंद्रन ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह मतदाता सूची को सही और अपडेट रखे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और सरकार सीधे तौर पर उसके काम को नियंत्रित नहीं करती।

उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव आयोग की व्यवस्था संविधान लागू होने के समय ही तय की गई थी। इसका मकसद चुनावी प्रक्रिया को राजनीतिक दखल से अलग रखते हुए स्वतंत्र तरीके से चलाना था। उन्होंने खुलकर कहा कि SIR को केवल राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय चुनाव व्यवस्था की जरूरत के तौर पर भी समझना चाहिए।

नाम कटने पर सड़क पर उतरना समाधान नहीं

SIR को लेकर सबसे बड़ी चिंता उन लोगों की है, जिनका नाम जांच या पुनरीक्षण के दौरान वोटर लिस्ट से हट गया है। इस पर भी जस्टिस रविंद्रन ने अपनी राय साफ रखी।

उन्होंने कहा कि अगर किसी मतदाता का नाम सूची से हटा दिया जाता है, तो उसके पास अपनी शिकायत दूर कराने के लिए कानूनी रास्ते मौजूद हैं। उनके मुताबिक, ऐसे मामले में सड़क पर उतरकर विरोध करने के बजाय संबंधित अधिकारी और अदालत का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक मतदाता के पास अपनी समस्या रखने के लिए केवल अदालत ही नहीं, बल्कि दूसरी संबंधित संस्थाएं और अधिकारी भी मौजूद हैं। ऐसे में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए शिकायत का समाधान कराया जा सकता है।

'शिकायत के लिए व्यवस्था मौजूद है'

पूर्व जज ने जोर दिया कि किसी मतदाता को लगता है कि उसके साथ गलत हुआ है, तो उसे अपनी शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान मांगने का अधिकार है। इसके लिए कानून में अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था मौजूद है।

प्रोटेस्ट के बीच आया पूर्व जज का बयान

उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लगातार बहस चल रही है। एक तरफ इसे मतदाता सूची को सही करने की जरूरी प्रक्रिया बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल इसके जरिए मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जता रहे हैं। इसको लेकर दिल्ली में कांग्रेस का प्रोटेस्ट भी चल रहा है।

Updated on:
07 Oct 2026 05:24 pm
Published on:
07 Oct 2026 05:24 pm