
ABVP: फ्लायदुबई की उड़ान में जानलेवा संकट के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए साहस और सूझबूझ दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को सम्मानित करने की मांग तेज हो गई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) के बाद अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी केंद्र सरकार से कैप्टन मच्छार को अशोक चक्र से सम्मानित करने की मांग की है। एबीवीपी ने ईटानगर में हुई दो दिवसीय अखिल भारतीय पदाधिकारी बैठक के बाद यह मांग रखी। संगठन ने कैप्टन मच्छार के साहस की सराहना करते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।
एबीवीपी के मुताबिक, संगठन की बैठक में कैप्टन स्मित मच्छार के साहस और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए उनके प्रयासों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद संगठन ने केंद्र सरकार से उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित करने की मांग की है। एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि कैप्टन मच्छार ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए जिस साहस और तत्परता का परिचय दिया, उसे देखते हुए उन्हें अशोक चक्र दिया जाना चाहिए। अशोक चक्र भारत का शांतिकाल में दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। यह युद्ध के मैदान से बाहर असाधारण वीरता, साहस या बलिदान के लिए दिया जाता है।
इससे पहले फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से कैप्टन स्मित मच्छार को उचित राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार या राष्ट्रीय नागरिक सम्मान देने पर विचार करने का अनुरोध किया था। फेडरेशन ने कहा था कि किसी भी सम्मान पर फैसला भारत सरकार के लागू प्रावधानों और सक्षम अधिकारियों की ओर से तथ्यों के वेरिफिकेशन के बाद लिया जाना चाहिए। संगठन ने कैप्टन मच्छार के साहस और मुश्किल परिस्थिति में दिखाई गई सूझबूझ को देखते हुए उनके नाम पर विचार करने की अपील की थी।
कैप्टन स्मित मच्छार फ्लायदुबई की उड़ान के पायलट थे। उड़ान के दौरान सह-पायलट ने उन पर हमला किया, जिसके बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और क्रू को हमलावर को काबू करने का मौका मिला। विमान करीब 14 हजार फीट नीचे आया था। बाद में बैकअप क्रू ने विमान को सऊदी अरब के ताबुक में सुरक्षित उतारा।