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‘उसे बस अपना काम और उड़ान दिखती है’, कैप्टन स्मित मच्छार के पिता ने सुनाई बेटे के जुनून की कहानी

Captain Smit Machchhar News: फ्लाईदुबई विमान में सह-पायलट के हमले के बावजूद यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्र मच्छार ने बेटे की बहादुरी के पीछे ईश्वर की कृपा को बताया है।
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Oct 02, 2026
Captain Smit Machchhar (1)
Captain Smit Machchhar (Photo-ANI)

Captain Smit Machchhar News: नई दिल्ली। फ्लाईदुबई विमान में सह-पायलट के हमले के बावजूद यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्र मच्छार ने बेटे की बहादुरी के पीछे ईश्वर की कृपा को बताया है। उन्होंने कहा कि बेटे के बहादुरी की खबर सुनते ही परिवार डर गया। कुछ ही मिनट बाद वे मंदिर पहुंचे और बेटे की सलामती के लिए प्रार्थना की। एनडीटी से बात करते हुए भूपेंद्र मच्छार ने बताया कि उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि किसी तरह की बुरी खबर न आए और उनके बेटे की रक्षा हो।

'ऐसी स्थिति के लिए कोई खास प्रशिक्षण नहीं होता'

भूपेंद्र ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए खास ट्रनिंग नहीं दी जाती। लेकिन भगवान की कृपा से स्मित को भीतर से ऐसी ताकत मिली कि संकट के समय उसने पूरी ताकत के साथ उसका सामना किया। उन्होंने कहा कि बेटे की बहादुरी के पीछे ईश्वर का आशीर्वाद है। उन्होंने बताया कि स्मित अबूधाबी के अस्पताल में उपचार के बाद ठीक हो रहा है, हालांकि घावों को पूरी तरह भरने में समय लगेगा। उसके सिर और दोनों हाथों में चोटें आई हैं। सिर का ऑपरेशन किया गया है और कई टांके लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि चोटें गंभीर हैं और पूरी तरह ठीक होने में कुछ समय लगेगा।

'उड़ान ही उसकी पत्नी जैसी है'

भूपेंद्र मच्छार ने बताया कि स्मित अपने पेशे को लेकर बेहद जुनूनी है और वह अक्सर दूसरे पायलटों की भी मदद करता रहा है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, 'उड़ान ही उसकी पत्नी जैसी है।' उन्होंने बताया कि स्मित करीब 17 साल से विमान उड़ा रहा है। इस दौरान उसने सैकड़ों पायलटों का मार्गदर्शन किया है। इंटरव्यू देने से लेकर विमानन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को समझने तक वह दूसरे पायलटों की मदद करता रहा है। स्मित के लिए उड़ान ही सब कुछ है और वह अपना काम बेहतर तरीके से करने तथा उच्च स्तर पर उड़ान भरने के अलावा किसी और चीज के बारे में नहीं सोचता।

'यात्रियों की जान बचाना सबसे पहले था'

पिता ने बताया कि स्मित मच्छार पर उनके सह-पायलट ने विमान के कॉकपिट के अंदर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले के दौरान विमान तेजी से नीचे जाने लगा। स्मित को एहसास हुआ कि खुद के साथ यात्रियों की जान बचाने के लिए उन्हें तुरंत कुछ करना होगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोला और चालक दल तथा यात्रियों को हमले की जानकारी दी। इसके बाद यात्रियों ने हमलावर को काबू में किया और ड्यूटी पर नहीं मौजूद अन्य पायलटों ने विमान को सुरक्षित उतारा।

उन्होंने कहा कि जब वह कॉकपिट के अंदर गिरे तो उन्होंने तय कर लिया कि जो कुछ करना है, तुरंत करना होगा, वरना कोई नहीं बचेगा। उन्हें समझ आ गया था कि मुकाबला करना ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने हिम्मत दिखाई और सफल रहे। उनके मन में सिर्फ एक बात थी कि उनके पीछे बैठे किसी भी यात्री की जान नहीं जानी चाहिए। यही बात उनके दिमाग में सबसे ऊपर थी। भगवान ने भी उनके इस इरादे का साथ दिया।

'गर्व का पल है, लेकिन पहले बेटे की सलामती जरूरी'

भूपेंद्र मच्छार ने कहा कि उन्हें बेटे पर गर्व है, लेकिन परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता उसकी सलामती है। उन्होंने कहा कि लोग इसे गर्व का क्षण बता रहे हैं, लेकिन उनके, उनकी पत्नी और स्मित की पत्नी के लिए सबसे पहले बेटे की सेहत और उसकी देखभाल जरूरी है। उन्होंने बताया कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद स्मित फिर से ड्यूटी फिर से शुरू करेगा।

Updated on:
02 Oct 2026 05:40 pm
Published on:
02 Oct 2026 05:40 pm