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Sonam Wangchuk News : पत्नी संग राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले- यह तो बस शुरुआत है

Sonam Wangchuk News : लद्दाख की मांगों को लेकर जारी 26 दिनों के लंबे अनशन और आंदोलन के समापन के बाद जाने-माने पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपनी पत्नी गीतांजलि आंगमो के साथ सोमवार को दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचे।
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Updated: 27 Jul 2026, 4:13 PM IST
Sonam Wangchuk
Sonam Wangchuk। Photo ANI

नई दिल्ली। लद्दाख की मांगों को लेकर जारी 26 दिनों के लंबे अनशन और आंदोलन के समापन के बाद जाने-माने पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपनी पत्नी गीतांजलि आंगमो के साथ सोमवार को दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचे। वहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। सोनम वांगचुक ने देश के युवाओं और आम नागरिकों को इस सफल सत्याग्रह के लिए बधाई दी है। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से लेकर संसद में लाए गए लोक परीक्षा संशोधन विधेयक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर वांगचुक ने खुलकर अपनी बात रखी।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा महज शुरुआत

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने कहा कि इस्तीफा केवल एक शुरुआत है। अगर अब समस्या को स्वीकार कर उसका समाधान तलाशा जाए तो हमारा देश और बेहतर बनेगा। मेरी नजर में यह प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। अभी बातचीत चल रही है और मुझे उम्मीद है कि आपसी सद्भाव से देश के लिए एक बेहतरीन परीक्षा प्रणाली लागू की जाएगी। संसद में पेश किए गए पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद सही कदम उठाए जाने चाहिए।

लाठी-पत्थर से नहीं, सहनशीलता और शांति से मिली सफलता

वांगचुक ने कहा कि मैं देश के युवाओं, बुजुर्गों और उन आयोजकों को बधाई देता हूं जिन्होंने इस आंदोलन को इतनी शांति से आगे बढ़ाया। हमें यह समझना होगा कि जो भी उपलब्धि हासिल हुई है, वह लाठी-पत्थर के बल पर नहीं, बल्कि हमारी शांतिपूर्ण अपीलों और खुद उठाए गए कष्टों की वजह से मिली है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हमारा संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान होना चाहिए। जो लोग शांति से विरोध कर रहे हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। हां, अगर कुछ असामाजिक तत्व दुर्भावना से काम कर रहे हैं, तो कानून अपना काम करेगा।

लद्दाख से राष्ट्रीय स्तर तक सफल रहा बापू का मार्ग

वांगचुक ने कहा कि पिछले 5-6 साल से वे लद्दाख में बापू के इस गांधीवादी रास्ते को अपना रहे हैं और यह हर स्तर पर उपयुक्त सिद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि मुझे संशय था कि क्या यह तरीका राष्ट्रीय स्तर पर काम करेगा या नहीं, लेकिन इस बार मुझे यह देखकर पूरा भरोसा हो गया है कि बापू का यह मार्ग 100 साल बाद भी देश में पूरी तरह प्रासंगिक है और आने वाले सैकड़ों-हजारों सालों तक रहेगा।

देश और दुनिया से शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील

सोनम वांगचुक ने देश और दुनिया के लोगों से अपील करते हुए कहा कि अपनी किसी भी शिकायत, मांग या अपील को रखने के लिए हमेशा बापू के दिखाए शांतिपूर्ण रास्ते को ही चुनें। शांति और अहिंसा के मार्ग से समाधान मिलना तय है। इसमें थोड़ा समय भले ही लग सकता है, लेकिन इसका अंत कभी अंधेरे में नहीं होता। यह हमने खुद देखा है। संभव है कि पहली बार में सफलता न मिले, लेकिन निरंतर प्रयास से सफलता जरूर हासिल होती है।

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27 Jul 2026, 4:13 PM IST
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