
Sonia Gandhi on Modi Government: देश के युवाओं के भविष्य और नीट (NEET) परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ आक्रोश अब एक भीषण राजनीतिक मोड़ ले चुका है। हाल ही में छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर हुई सख्त पुलिसिया कार्रवाई को लेकर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने ही देश के नौजवानों को संवारने के बजाय उन्हें 'राष्ट्र का दुश्मन' मानकर उनके साथ बेरहमी से पेश आ रही है।
एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र 'द हिंदू' में प्रकाशित अपने लेख 'एन एजुकेशन सिस्टम्स कोलैप्स, यंग इंडियाज ट्रॉमा' में सोनिया गांधी ने 20 जुलाई 2026 की घटना को 'कलंक का दिन' (Day of Infamy) करार दिया। उन्होंने दावा किया कि अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों पर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) ने बिना सोचे-समझे लाठियां और आंसू गैस के गोले बरसाए। यहां तक कि विरोध स्थल से घर लौट रहे छात्रों को भी नहीं बख्शा गया।
"जब देश की युवा पीढ़ी अपनी शिक्षा और भविष्य के लिए जवाबदेही मांगती है, तो सरकार संवाद के बजाय लाठियों और क्रूरता से जवाब देती है। यह सरकार के अहंकार और असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है।"- सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने अपने लेख "शिक्षा तंत्र का पतन, युवा भारत का आघात" में लिखा कि नीट पेपर लीक की घटनाओं से देश का युवा पूरी तरह हताश हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब सरकार ने अपने नागरिकों के असंतोष को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की हो।
पुरानी यादें ताजा: उन्होंने 2020 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA-NRC) के दौरान यूनिवर्सिटी परिसरों में हुई पुलिसिया कार्रवाई और देश का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवानों के प्रदर्शन के दौरान हुए दुर्व्यवहार की याद दिलाई।
मीडिया पर निशाना: उन्होंने कहा कि आज जब देश की अंतरात्मा इस क्रूरता से आहत है, तब सरकार और उसका गोदी मीडिया इस जनाक्रोश को भटकाने की साजिश रच रहे हैं।
बढ़ते बवाल और चौतरफा घिरती सरकार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है। सोनिया गांधी के बयानों के ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने एक कड़ा संदेश जारी कर पेपर लीक करने वाले भू-माफियाओं और अपराधियों पर शिकंजा कसने का रोडमैप पेश किया।
सख्त एंटी-चीटिंग बिल: आगामी संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में एंटी-चीटिंग कानून को और अधिक कठोर बनाने वाला नया विधेयक पेश किया जाएगा।
फास्ट-ट्रैक अदालतें: पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव है।
22 लाख छात्रों का भविष्य: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पिछले ढाई महीनों से इस संकट पर काम कर रही है और पुनरीक्षा (Re-test) कराकर 22 लाख नीट परीक्षार्थियों का एक साल बर्बाद होने से बचाया गया है।
NTA में सुधार: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीट पेपर लीक कांड अब सिर्फ छात्रों की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह आगामी चुनावी और राजनीतिक समीकरणों को झकझोरने वाला सबसे संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि सरकार के नए कड़े कानून से छात्रों का खोया भरोसा वापस बहाल हो पाता है या नहीं।