
Sukhbir Singh Badal: पंजाब की राजनीति में इन दिनों जुबानी जंग तेज हो गई है। राज्य की शिक्षा व्यवस्था और लगातार हो रहे कर्मचारियों के प्रदर्शनों को लेकर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आम आदमी पार्टी (AAP) और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया के जरिए 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस पर निशाना साधा है।
सुखबीर सिंह बादल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पंजाब सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए लिखा कि राज्य में जिसे 'शिक्षा क्रांति' का नाम देकर प्रचारित किया जा रहा है, वह असल में एक बड़ा छलावा और शिक्षा घोटाला है।
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर तंज कसते हुए अकाली दल प्रमुख ने लिखा कि पंजाब की जमीनी हकीकत और यहां के मुद्दे शायद केजरीवाल और सिसोदिया के लिए 'सिलेबस से बाहर' की बात हैं। उनका कहना था कि सरकार पंजाब की जनता के सामने झूठा प्रोपेगैंडा फैला रही है जिसे पूरी तरह बेनकाब किया जाना जरूरी है।
शिक्षा के अलावा, राज्य में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों और चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी बादल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब का लगभग हर विभाग इस समय अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर है। राज्य में एक तरफ जहां शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और सेवा से जुड़ी चिंताओं को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बिजली कर्मचारी अपने 18 प्रतिशत बकाया डीए, सही पे-स्केल और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
हालात यह हैं कि मनरेगा कर्मी पेंडिंग मजदूरी और नौकरी पक्की करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो सफाई कर्मचारी अपनी नौकरी की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। इसके साथ ही मोहल्ला क्लिनिक का स्वास्थ्य स्टाफ भी बेहतर वेतनमान और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध जता रहा है। सरकार की नीति पर तंज कसते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि जब कर्मचारियों के सामने 6 अलग-अलग समस्याएं खड़ी होती हैं, तो इस सरकार के पास उनका केवल एक ही समाधान होता है लाठीचार्ज।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर निशाना साधते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर विफलता के बाद भी सरकार का रवैया शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि जब लगभग हर विभाग का कर्मचारी सड़कों पर धरना देने के लिए मजबूर हो जाए, तो खराबी कर्मचारियों में नहीं, बल्कि शासन चला रही आम आदमी पार्टी की सरकार की नीतियों में होती है।