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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIT पुनर्गठन और सीनियर IPS अधिकारियों को शामिल करने के दिए निर्देश

Ram Mandir donation case: अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए SIT के पुनर्गठन का सुझाव दिया। कोर्ट ने अनुभवी IPS अधिकारियों को जांच टीम में शामिल करने की बात कही।
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Jul 20, 2026
supreme court
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Ram Mandir Donation Dispute Row: अयोध्या के श्री राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की तीन जजों की बेंच ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के पुनर्गठन का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच को पारदर्शी नतीजे तक पहुंचाने के लिए यह जरूरी है कि SIT का नेतृत्व एक सीनियर और अनुभवी IPS अधिकारी करें। इस मामले में अगली सुनवाई अब अगले हफ्ते सोमवार (27 जुलाई) को होगी।

वरिष्ठ IPS अफसरों की देखरेख में हो निष्पक्ष जांच- सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश की और कोर्ट को बताया कि इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम जांच कर रही है और मौजूदा SIT सीधे तौर पर फील्ड इन्वेस्टिगेशन में नहीं लगी है।

इस बात पर CJI सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक मजबूत और पुनर्गठित SIT की जरूरत है। अदालत ने सुझाव दिया कि पुनर्गठित SIT की कमान लखनऊ रेंज के इंस्पेक्टर जनरल (IG) रैंक के अधिकारी या किसी अन्य सीनियर IPS अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को इस संबंध में सरकार से जरूरी निर्देश लेने और अगली रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।

सीबीआई जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग

सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई RJD सांसद सुधाकर सिंह, वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव के साथ-साथ 'हिंदू धर्म परिषद' द्वारा दायर याचिकाओं पर हो रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए, इन याचिकाओं में मुख्य रूप से सीबीआई जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की गई है।

याचिकाओं में मांग की गई है कि इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। इनमें राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय खातों का फोरेंसिक ऑडिट या CAG (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) से ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसके अलावा, याचिकाओं में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों, CCTV फुटेज और सभी वित्तीय रिकॉर्ड को तुरंत सुरक्षित रखने और साथ ही देश भर के प्रमुख मंदिरों में दान और चढ़ावे के प्रबंधन के लिए पारदर्शी दिशानिर्देश बनाने की भी मांग की गई है।

CCTV में कैद हुई नोटों की गड्डियों की हेराफेरी

जांच एजेंसी द्वारा तैयार की गई शुरुआती जांच रिपोर्ट में नोट गिनने वाले इलाके में लगे CCTV कैमरों में संदिग्ध गतिविधियां कैद होने की बात सामने आई थी। गिनती की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों द्वारा नकदी छिपाने और सुरक्षा में चूक के गंभीर मामले सामने आए थे। अब तक इस मामले में कई गिरफ्तारियां हुई हैं और पुलिस रिमांड के दौरान सोने के गहने, नकदी और एक गाड़ी बरामद की गई है।

Updated on:
20 Jul 2026 04:49 pm
Published on:
20 Jul 2026 03:52 pm