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16 साल बाद भी नहीं मिला तलाक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-पति को देना होगा 15,000 का गुजारा भत्ता

सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से अलग रह रहे पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल लंबे समय तक दूर रहना विवाह समाप्त करने का आधार नहीं है। कोर्ट ने पति को भरण-पोषण जारी रखने का निर्देश दिया।
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Apr 10, 2026
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फाइल फोटो पत्रिका

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में 16 साल से अलग रह रहे पति की तलाक याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सिर्फ लंबे समय से अलग रहना अपने आप में तलाक का आधार नहीं हो सकता, जब तक यह साबित न हो कि विवाह पूरी तरह खत्म हो चुका है और सुलह की कोई संभावना नहीं बची है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी को 15,000 मासिक भरण-पोषण देता रहे और मामले में शांति बनाए रखे।

16 साल से अलग रह रहा दंपति

मामला एक ऐसे दंपति का है जो पिछले 16 सालों से अलग-अलग रह रहे हैं। पति ने अदालत में दलील दी कि दोनों के बीच लंबे समय से “स्वभाविक मतभेद” हैं और रिश्ते में कोई सामंजस्य नहीं बचा है। इसी आधार पर उसने विवाह को समाप्त करने और तलाक देने की मांग की। पति का कहना था कि इतने लंबे समय से अलग रहने के बाद अब शादी को जारी रखना व्यावहारिक नहीं रह गया है।

पति ने मांगा तलाक, आर्थिक बोझ का दिया हवाला

पति की ओर से अदालत में बताया गया कि वह पहले से ही अपनी पत्नी को हर महीने 15,000 भरण-पोषण दे रहा है। उसके वकील ने कहा कि लंबे समय से अलग रहने और लगातार चल रहे मतभेदों के कारण विवाह व्यावहारिक रूप से टूट चुका है, इसलिए इसे कानूनी रूप से समाप्त किया जाना चाहिए। पति ने यह भी कहा कि वह सीमित आय में जीवन यापन कर रहा है और उसके लिए बढ़ते आर्थिक दायित्वों को निभाना कठिन हो रहा है।

पत्नी ने साथ रहने की जताई इच्छा

वहीं पत्नी ने पति के दावे का विरोध करते हुए कहा कि उसने कभी भी रिश्ते को पूरी तरह खत्म नहीं माना है। उसने अदालत में यह भी कहा कि वह आज भी पति के साथ रहने के लिए तैयार है, और पहले भी उसने यह इच्छा व्यक्त की थी। पत्नी के अनुसार, केवल अलग रहना इस बात का प्रमाण नहीं है कि विवाह पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह को समाप्त करने के लिए केवल लंबा अलगाव पर्याप्त आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब एक पक्ष अब भी साथ रहने को तैयार हो। अदालत ने यह भी कहा कि 15,000 की राशि आज के समय में बहुत कम है, मामले पर अंतिम टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी और पति को निर्देश दिया गया कि वह भरण-पोषण देता रहे तथा शांति बनाए रखे।

Updated on:
10 Apr 2026 07:08 pm
Published on:
10 Apr 2026 07:05 pm