
इजरायली पीएम नेतन्याहू। (Photo-IANS)
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम के बाद कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदें जताई जा रही हैं। इसी बीच इजराइल के भारत में राजदूत रूवेन अजार ने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रूवेन अजार ने कहा, “हम पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करते। और यह मान लेना भी ठीक नहीं कि अमेरिका उन पर पूरी तरह भरोसा करता है। उनकी भूमिका सिर्फ सुविधा देने तक सीमित है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।” उनके इस बयान से साफ है कि इजराइल पाकिस्तान को एक भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं मानता। अजार के मुताबिक, पाकिस्तान केवल लॉजिस्टिक सहयोग दे रहा है, जबकि असली भूमिका और उम्मीदें अमेरिका से जुड़ी हैं कि वह क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में कदम उठाए।
इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम के बाद सीधे संवाद की योजना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बातचीत मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और स्थायी समाधान तलाशने की दिशा में अहम मानी जा रही है। हालांकि, पाकिस्तान की भूमिका को लेकर संदेह बना हुआ है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि व्हाइट हाउस ने इस्लामाबाद पर दबाव डालकर ईरान को युद्धविराम के लिए राजी किया। इससे पाकिस्तान की स्वतंत्र कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठे हैं और उसकी ‘पीसमेकर’ छवि भी प्रभावित हुई है।
इजराइल ने साफ किया है कि वह अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उसके अनुसार, लेबनान में उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी, भले ही इसका असर युद्धविराम पर पड़े। वहीं लेबनान में जारी हमलों को लेकर ईरान ने चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि इससे पूरा समझौता टूट सकता है। इससे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर भी तनाव बढ़ने की आशंका है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
Updated on:
10 Apr 2026 05:57 pm
Published on:
10 Apr 2026 05:51 pm
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