
Private universities: प्राइवेट यूनिवर्सिटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम वक्तव्य दिया है। कोर्ट ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों को शिक्षा के व्यापक जनहित को पूरा करना चाहिए, न कि सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए चलाना चाहिए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने यहां संचालित निजी विश्वविद्यालयों के सरप्लस इनकम, खर्च, फीस वसूली और कर्मचारियों के वेतन का ऑडिटेड हिसाब-किताब जमा करने का निर्देश दिया। इसके अलावा एडमिशन, भर्ती और टीचिंग स्टैंडर्ड्स से जुड़ी जानकारी भी सौंपने को कहा गया है।
यह पूरा मामला एमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़ा है। यहां एक छात्र को कॉलेज के रिकॉर्ड में नाम बदलने की मांग पर परेशान किया गया था। पिछले साल इस मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नवंबर 2025 में व्यापक आदेश जारी किए थे। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा कि यह पूरी व्यवस्था व्यापक हित के लिए काम करती है। ऐसे में हम यह स्प्ष्ट कर देना चाहते है कि कोई भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी मुनाफा कमाने वाली संस्था के रूप में नहीं चलाई जा सकती।
इस मामले पर कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि उन्हें बताना होगा कि विश्वविद्यालयों ने छात्रों से दाखिले और कोर्स के दौरान अलग-अलग मदों में कितनी फीस ली। साथ ही विश्वविद्यालयों के पैसे के इस्तेमाल और बची रकम का ब्योरा भी देना होगा। इसके अलावा विश्वविद्यालयों को फंड की ऑडिट रिपोर्ट भी देनी होगी। इसमें जुटाई गई रकम, उसके इस्तेमाल और विश्वविद्यालय के काम के लिए किए गए भुगतान का ब्योरा होगा। बची रकम और उसके निवेश की जानकारी भी देनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी रेगुलेटरी अथॉरिटीज जैसे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, राष्ट्रीय डेंटल आयोग, भारतीय नर्सिंग परिषद, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, फार्मेसी काउंसिल और अन्य नियामकों से निरीक्षण की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने दाखिले की प्रक्रिया की जानकारी भी मांगी है। प्रश्नपत्र बनाने और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करने वालों की जानकारी भी देनी होगी। शिक्षकों को पिछले साल कितने घंटे पढ़ाना था और उन्होंने कितनी कक्षाएं लीं, इसका भी हिसाब देना होगा। इस मामले में अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।