Supreme Court on Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर 19 मई के अपने आदेश में बदलाव या स्पष्टीकरण देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने एनजीओ ‘एनीमल आर पीपल टू’ को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।
Supreme Court on Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर 19 मई को दिए गए अपने आदेश में किसी भी तरह का बदलाव या स्पष्टीकरण देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने एनजीओ ‘एनीमल आर पीपल टू’ की याचिका पर सुनवाई करने से मना करते हुए कहा कि यदि कोई शिकायत या भ्रम है तो याचिकाकर्ता पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि किसी राजनीतिक बयान के आधार पर सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में बदलाव नहीं कर सकता।
एनजीओ ‘एनीमल आर पीपल टू’ ने अपनी याचिका में आशंका जताई थी कि सुप्रीम कोर्ट के 19 मई के आदेश का गलत अर्थ निकालकर आवारा कुत्तों की अंधाधुंध हत्या को सही ठहराया जा रहा है।
याचिका में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित बयान और खालसा कॉलेज परिसर से कुत्तों को हटाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया गया था।
इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर मुख्यमंत्री कोई बयान देते हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि हमें अपना आदेश बदलना पड़ेगा?”
सुनवाई के दौरान एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने और संबंधित मुद्दों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उठाने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
एनजीओ ने अपनी अर्जी में कहा था कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) एक्ट-2023 के तहत केवल तय कानूनी प्रक्रिया में ही यूथेनेशिया (दया मृत्यु) की अनुमति है।
याचिका में कहा गया कि किसी भी सामान्य आवारा कुत्ते को मनमाने ढंग से 'आक्रामक' या 'खतरनाक' घोषित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई के आदेश में कहा था कि जिन इलाकों में आवारा कुत्तों के हमले बढ़ रहे हैं, वहां संबंधित अधिकारी कानून के तहत जरूरी कदम उठा सकते हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमार या स्पष्ट रूप से खतरनाक कुत्तों के मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए यूथेनेशिया की अनुमति दी जा सकती है।
यह मामला देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और पशु अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर जारी बहस के बीच सामने आया है।