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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘हमारे फैसलों की आलोचना करना गलत नहीं, यह लोगों का अधिकार है’

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पुरानी सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से फैसलों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा, किसी फैसलें के बारे में अपनी राय जाहिर करना गलत नहीं है। सीजेआइ सूर्यकांत, […]

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Mar 21, 2026
फोटो पत्रिका नेटवर्क

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पुरानी सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से फैसलों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा, किसी फैसलें के बारे में अपनी राय जाहिर करना गलत नहीं है। सीजेआइ सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की बेंच इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में 8वीं की पुरानी सामाजिक विज्ञान की किताब में लिखी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई गई थी कि ‘हाल के फैसले झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वालों को शहर में अतिक्रमणकारी के तौर पर देखा जाता है’।

सीजेआइ ने कहा, यह किसी फैसलेे के बारे में एक नजरिया है। यह एक स्वस्थ आलोचना है। न्यायपालिका को इस बारे में ज्यादा संवदेनशील क्यों होना चाहिए? किताब का यह बताता है कि न्यायपालिका की बनावट कैसी है, वह कैसे काम करती है? लोगों को हमारे फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है। सीजेआइ ने कहा, किसी अदालती फैसले के बारे में लोगों की राय सही या गलत हो सकती है। अदालत ने याचिका को खारिज करते कहा कि अब इसका कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह पुस्तक सिर्फ 2015-16 के शैक्षणिक सत्र में थी।

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विवादित अध्याय की समीक्षा करेगी विशेषज्ञ समिति

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि कक्षा 8 में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। समिति में पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, पूर्व जज इंदु मल्होत्रा और पूर्व जस्टिस अनिरुद्ध बोस समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समिति अध्याय की समीक्षा कर नया मसौदा तैयार करेगी।

'पत्नी जीवनसाथी है, काम वाली बाई नहीं': घरेलू कामकाज न करना क्रूरता नहीं

नई दिल्ली। वैवाहिक विवाद के एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बेहद अहम टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी खाना बनाने जैसे घरेलू काम नहीं करती है, तो इसे 'क्रूरता' मानकर तलाक का आधार नहीं बनाया जा सकता। जस्टिस संदीप मेहता ने मौखिक रूप से कहा, आप किसी काम वाली बाई से शादी नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक जीवनसाथी से शादी कर रहे हैं।

पति भी बंटाए खाना पकाने में हाथ

जस्टिस विक्रम नाथ ने आधुनिक सामाजिक ढांचे पर जोर देते हुए कहा कि अब समय बदल चुका है और पति को भी खाना पकाने व साफ-सफाई जैसे कामों में हाथ बंटाना चाहिए। शीर्ष अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें पति ने आरोप लगाया था कि शादी के एक हफ्ते बाद ही पत्नी का व्यवहार बदल गया और उसने खाना बनाने से मना कर दिया।

निचली अदालत बनाम हाई कोर्ट

बता दें कि साल 2017 में हुई इस शादी के मामले में फैमिली कोर्ट ने पति की दलील स्वीकार करते हुए 'क्रूरता' के आधार पर तलाक दे दिया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया, जिसके खिलाफ पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने अब दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।

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Published on:
21 Mar 2026 08:47 am
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