
Raja Raghuvanshi Case: राजा रघुवंशी हत्या मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ दायर मेघालय सरकार की याचिका पर अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। आज गुरुवार 9 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह विचारणीय मुद्दा है। उसे पहले के दो फैसले देखना होगा। देखना होगा कि दो फैसलों में मतभेद होने की वजह से क्या इसे बड़ी बेंच के पास भेजा जाए।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मेघालय सरकार से कहा है कि वह सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के समय कथित तौर पर उपलब्ध कराए गए 'गिरफ्तारी के आधार' की प्रति अदालत में प्रस्तुत करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ये देखना होगा कि ये आधार टिकने वाला है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट विस्तार से इस बात की जांच करेगा कि कानून के अनुसार सोनम को गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की जमानत पर रोक लगाने की मेघालय सरकार की मांग पर भी सुनवाई की थी।
इससे पहले सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर खुद को बेकसूर बताया था। अभियोजन का मामला परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर है। इसे कोर्ट में संदेह से परे साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी है। सिर्फ आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता है, ऐसे में कोर्ट के पास उसकी जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं है। वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है।
सोनम रघुवंशी को मेघालय की एक अदालत ने इस आधार पर जमानत दी थी कि गिरफ्तारी के समय उसे कानून के अनुसार गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए थे। हालांकि, अभियोजन पक्ष का कहना है कि सोनम को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी दी गई थी।
मेघालय सरकार के अनुसार विवाद केवल एक टाइपिंग त्रुटि का है। दस्तावेज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), जो हत्या के अपराध के लिए दंड का प्रावधान करती है, की जगह गलती से धारा 403(1) लिख दिया गया, जबकि बीएनएस में ऐसी कोई धारा मौजूद ही नहीं है।