
Tabassum Khan Threats: मध्य प्रदेश में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या करने के आरोप में 14 गौ रक्षकों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई धमकी भरे वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें उन्हें धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया है। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट से जुड़े न्यायिक संगठनों ने धमकियों की कड़ी निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फैसला आने के तुरंत बाद दोषियों के परिवार के लोग अदालत के बाहर इकट्ठा हुए। उन्होंने फैसले का विरोध किया और दोषियों को जेल ले जाने से रोकने की कोशिश की। उनका आरोप था कि इन लोगों को गाय बचाने की वजह से सजा दी गई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए। एक वीडियो में एक व्यक्ति ने चेतावनी दी कि अगर दोषियों को 10 दिनों के भीतर रिहा नहीं किया गया तो पूरे देश में खून-खराबा होगा। इन वीडियो में धमकी देने वालों के चेहरे और सोशल मीडिया अकाउंट भी साफ दिखाई दे रहे थे।
यह घटना साल 2022 की है। 50 साल के नजीर अहमद रात के समय मवेशियों को लेकर जा रहे थे। इसी दौरान खुद को गौ रक्षक बताने वाले लोगों के एक समूह ने उनका वाहन रोक लिया। आरोप है कि डंडों और लोहे की रॉड से लैस लोगों ने गायों की तस्करी के शक में नजीर अहमद और उनके दो साथियों को वाहन से बाहर निकालकर बुरी तरह पीटा। हमले में गंभीर रूप से घायल नजीर अहमद की मौत हो गई, जबकि उनके दोनों साथी बच गए।
12 जून को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने इस मामले में 14 आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और गलत तरीके से रोकने समेत कई अपराधों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अपने फैसले में जज ने कहा कि यह भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या का साफ मामला है।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू ने एक्स पर लिखा कि ये विरोध केवल फैसले की आलोचना नहीं थे, बल्कि जज खान की पहचान को सिर्फ उनके धर्म तक सीमित करके, एक न्यायिक अधिकारी के तौर पर उनके अधिकार को कमजोर करना। उन्होंने आगे लिखा, 'उनकी मुस्लिम पहचान ही वह मुख्य आधार बनी जिस पर फैसले की वैधता पर सवाल उठाए गए। यह न्याय की एक खतरनाक उल्टी स्थिति थी। न्यायिक फैसलों का मूल्यांकन कानून के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि फैसला सुनाने वाले व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर।
पुलिस अधिकारी सुधाकर बारस्कर ने बताया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है और दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साइबर सेल भड़काऊ वीडियो शेयर करने वालों की पहचान कर रही है और सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखी जा रही है।