
आफताब अमीन पूनावाला और श्रद्धा वालकर | फोटो सोर्स- ANI
Shraddha Murder Case Update: दिल्ली के चर्चित श्रद्धा वालकर हत्याकांड में अदालत ने आरोपी आफताब की यूनिवर्सिटी परीक्षा के चलते 20 जुलाई को होने वाली सुनवाई रद्द कर दी है। आफताब ने जेल से ही परीक्षा देने के लिए कोर्ट आने से छूट मांगी थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद श्रद्धा के दोस्त रजत शुक्ला ने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बहुत ही शर्मनाक बात है। रजत ने भावुक होकर कहा कि भले ही कानून की नजर में एक जज वकील से ऊपर हो, हाई कोर्ट निचली अदालत से ऊपर हो और सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट से ऊपर हो, लेकिन एक लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च होती है। जब देश में कई जरूरी मामलों के लिए अदालतें रात को भी खोली जा सकती हैं, तो फिर चार साल बीत जाने के बाद भी श्रद्धा को इंसाफ क्यों नहीं मिला? आज तक श्रद्धा का अंतिम संस्कार तक नहीं हो सका है, लेकिन यहां कातिल आफताब पर दया दिखाई जा रही है।
देश को झकझोर देने वाले श्रद्धा वालकर हत्याकांड को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन मामले में अब तक ट्रायल पूरा नहीं होने पर श्रद्धा के करीबी दोस्त रजत शुक्ला ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि आरोपी आफताब पूनावाला ने श्रद्धा के शव के 35 टुकड़े किए थे, लेकिन इसके बावजूद उसे अब तक फांसी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और न्याय प्रक्रिया में हो रही देरी बेहद दुखद है।
रजत शुक्ला ने कहा कि श्रद्धा के परिवार को आज तक पूरा न्याय नहीं मिल पाया है। उनका दावा है कि श्रद्धा का अंतिम संस्कार भी अब तक नहीं हो सका क्योंकि उनका शव परिवार को पूरी तरह नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा कि चार साल बीत जाने के बावजूद यह मामला अपने अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंचा है, जिससे परिवार लगातार पीड़ा झेल रहा है।
उन्होंने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश में लाखों मामले लंबित हैं, लेकिन यदि किसी मामले को प्राथमिकता दी जाए तो अदालतें रात में भी खुल सकती हैं। ऐसे में श्रद्धा वालकर जैसे जघन्य हत्याकांड में चार साल बाद भी ट्रायल आगे नहीं बढ़ना चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी आफताब को परीक्षा देने जैसी राहत देकर उसके लिए दया दिखाई जा रही है, जबकि पीड़ित परिवार के लिए कोई दया नहीं दिखाया जा रहा।
रजत शुक्ला ने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में समय पर सख्त सजा नहीं मिलेगी तो समाज में गलत संदेश जाएगा। उनके मुताबिक, हाल के वर्षों में कई निर्मम हत्याओं के मामलों में अपराधियों का दुस्साहस बढ़ा है और इसके पीछे न्याय मिलने में हो रही देरी भी एक बड़ी वजह हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिन संस्थाओं के पास कार्रवाई की जिम्मेदारी है, उन्हें तेजी से प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
Updated on:
12 Jul 2026 03:08 pm
Published on:
12 Jul 2026 01:55 pm
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