तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा। इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (Tamil Nadu Assembly Elections) में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। चुनावी नतीजों के बाद किसके सिर पर ताज होगा? ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए इस सियासी भंवर को समझने का प्रयास करते हैं।
Tamil Nadu Assembly Elections: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की सियासी सरगर्मियां तेज हैं। चुनावी तपिश के बीच चेन्नई के मईलापुर विधानसभा क्षेत्र में 7वीं सदी के कपालेश्वर मंदिर से भाजपा प्रत्याशी व पूर्व राज्यपाल तमिलइसै सौंदरराजन के लिए गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो में बड़ी संख्या में AIADMK समर्थक शामिल हुए। AIADMK के झंडे, भाजपा के मुकाबले कहीं अधिक थे।
चेन्नई में मईलापुर क्षेत्र के चुनावी प्रचार में गठबंधन दलों के प्रमुख नेताओं के पोस्टरों और झंडों में भाजपा के पोस्टर-झंडे कम दिखाई दिए। ऐसा तालमेल 23 अप्रैल को मतदान के दिन भी कायम रहा और अन्नाद्रमुक के वोट भाजपा के खाते में ट्रांसफर हुए तो परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। मईलापुर सीट की बात करें तो सौंदरराजन को DMK उम्मीदवार डी. वेलु, टीवीके के पी.वेंकटरमण और NTK के आरएल अरुण से कड़ी टक्कर मिल रही है। उनकी नजर DMK विरोधी वोटों को एकजुट करने और शहरी मध्यम वर्ग के साथ महिला मतदाताओं के ठोस समर्थन पर है।
मईलापुर दक्षिण भारत की सबसे पुरानी शहरी बस्ती है, जहां मछुआरा समुदाय, तमिल ब्राह्मण, नागरथार व्यापारी और शहरी मध्यम वर्ग एक साथ रहते हैं। पल्लव युग के मंदिर और पुर्तगालियों के बनाए चर्च ध्यान खींचते हैं। सौंदरराजन महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण की बात करती हैं। ऐतिहासिक विरासतों को संजोने और बुनियादी समस्याएं हल करने का वादा भी कर रही हैं, लेकिन DMK के गहरे नेटवर्क और छोटे दलों की मौजूदगी ने मुकाबले को बहुकोणीय और रोचक बना दिया है।
तमिलनाडु की अन्य 27 विधानसभा सीटों पर भी भाजपा के सामने कमोबेश ऐसी ही चुनौती है। उसका प्रदर्शन गठबंधन दलों के मतों के ट्रांसफर पर काफी निर्भर है। पिछले लोकसभा चुनाव में छोटे दलों के साथ भाजपा गठबंधन को 18.28% (अकेले 11.24%), जबकि AIADMK गठबंधन को 23% मत मिले। DMK गठबंधन ने 46% मत के साथ सभी 39 सीटें जीत ली। भाजपा समर्थकों की शिकायत है कि AIADMK के मत उनके खाते में सहज रूप से नहीं आते।
प्रवासी राजस्थानी समुदाय के वर्चस्व वाले साहूकार पेट में कृष्णा नथानी कहते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी के कमान संभालने के बाद लोगों की सोच काफी बदली है। अन्नामलै ने पार्टी की नींव को मजबूत किया और अब इमारत खड़ी होगी। पुरुसईवाक्कम में चर्चा के दौरान आशीष जैन, संजय भंसाली और प्रशांत कोठारी ने कहा कि परिसीमन मुद्दे पर द्रमुक ने लोकसभा सीटों के नुकसान की जो बात कही है, वह लोगों के मन में उतर गई है। यह भाजपा के खिलाफ जा सकती है, क्योंकि गठबंधन दलों के मतदाताओं को भी यह बात चुभ रही है।
तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती है, पर राज्य के दक्षिणतम छोर कन्याकुमारी में दो राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। नागरकोइल से भाजपा के वर्तमान विधायक एमआर गांधी, कन्याकुमारी से विजय धारिणी, सातुर से प्रदेश अध्यक्ष नायनार नागेंद्रन और कोयम्बटूर उत्तर से महिला मोर्चा की अध्यक्ष वणति श्रीनिवासन मजबूत दावेदार हैं। अविनाशी से केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन अपने दलित वोट बैंक के अलावा गठबंधन से समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। पिछली बार भाजपा 20 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 4 सीटों पर उसे जीत मिली थी। इस बार 27 सीटों पर चुनौती दे रही है और अधिक मत प्रतिशत के साथ ज्यादा सीटों की उम्मीद है।