
Tamil Nadu Governor vs DMK: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से दो माह पहले राजनीति चरम पर है। राज्यपाल आरएन रवि ने मंगलवार को विधानसभा सत्र की शुरुआत में अभिभाषण नहीं पढ़ा। राज्यपाल रवि सदन में आए और राष्ट्रगान के बजाय तमिल प्रार्थना शुरू होने पर तमिल में अभिवादन कर अभिभाषण पढ़े बिना लौट गए। राज्यपाल के लौटने के बाद सदन ने सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर अभिभाषण पढ़ा हुआ मान लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी सदन में मौजूद थे। राज्यपाल के सदन से लौटने के कुछ मिनट बाद ही लोकभवन से जारी बयान में कहा गया कि सदन में राष्ट्रगान का अपमान किया गया और अभिभाषण में तथ्यात्मक गलतियां होने के कारण राज्यपाल ने अभिभाषण नहीं पढ़ा। यह भी आरोप लगाया कि बार-बार माइक बंद करने के कारण राज्यपाल अपनी बात नहीं रख पाए।
लोकभवन से जारी 13 बिंदुओं के बयान में अभिभाषण में असत्यापित दावे और भ्रामक बातें शामिल होने तथा कई महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए डीएमके सरकार की बखिया उधेड़ी गई। बयान में कहा गया कि निवेश, महिला सुरक्षा, नशाखोरी, दलित अत्याचार के मामले में राज्य की हालत खराब है। आत्महत्या की घटनाओं के कारण तमिलनाडु सुसाइड कैपिटल कहा जाने लगा है।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी द्रमुक राज्यपाल के अभिभाषण का प्रावधान हटाने के लिए संविधान संशोधन का प्रयास करेगी। उन्होंने सदन में कहा कि राज्यपाल का हर साल सरकार के अभिभाषण को ठुकराना सही नहीं है। ऐसी प्रथा जिसे बार-बार तोड़ा जा रहा है उसकी प्रासंगिकता क्या है? वह विपक्ष के अन्य दलों से इस बारे में चर्चा करेंगे।
राज्यपाल के अभिभाषण पर केरल में भी विवाद हुआ। मंगलवार को केरल विधानसभा में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के सदन में भाषण समाप्त होने के तुरंत बाद सीएम विजयन ने सदन में कहा कि राज्यपाल ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण के कुछ हिस्से छोड़ दिए गए और कुछ जोड़ दिए गए। इस पर लोकभवन ने बयान जारी कर कहा कि सरकार को अभिभाषण में कुछ संशोधन सुझाकर लौटाया गया था लेकिन उन्होंने बिना संशोधन अभिभाषण वापस भेज दिया।