
Tamil Nadu Assembly AIADMK Walkout: तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को हंगामे की स्थिति बन गई। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इस दौरान पार्टी ने आरोप लगाया कि शून्यकाल के दौरान हमें बोलने नहीं दिया जा रहा है और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने नहीं दिया जा रहा है। वहीं अन्य विपक्षी दलों ने भी अमोनिया गैस रिसाव मामले पर सदन में चर्चा की मांग की।
AIADMK के महासचिव और विपक्ष के नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी ने कहा कि सदन में पार्टी ने जनता के मुद्दों पर बोलने के लिए बार-बार मौका देने को कहा, लेकिन स्पीकर ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी।
उन्होंने आगे कहा कि आज शून्यकाल में हमें बोलने नहीं दिया गया। विधानसभा के भीतर हमें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल रहा है। हमने जनता के मुद्दे उठाने के लिए वक्त मांगा था, लेकिन हमें अनुमति नहीं दी गई।
वहीं सदन में अन्य विपक्षी दलों ने अमोनिया गैस रिसाव मामले पर सदन में चर्चा की मांग की है। उन्होंने घटना की जवाबदेही तय करने और सुरक्षा चूक पर रिपोर्ट पेश करने की भी मांग की है।
विपक्ष की ओर से बढ़ते दवाब पर टीवीके सरकार की ओर से भी बयान सामने आया है। विधानसभा उपाध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने आश्वासन दिया कि विपक्षी सदस्यों को इस मामले पर अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमोनिया गैस रिसाव की घटना पर डीएमके, AIADMK समेत कई सदस्यों ने चर्चा की मांग की है और विपक्ष को इस पर बोलने का मौका दिया जाएगा।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) (CPI-M) के नेता पी. शनमुगम ने कहा कि एक बड़ा हादसा हुआ है। इस काम में बड़ी संख्या में बाल मजदूरों को लगाया गया है। इस इलाके में सिर्फ 16 से 25 साल के मजदूर ही प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु सरकार के फैक्टरी इंस्पेक्टरों को फैक्टरियों का ठीक से इंस्पेक्शन करना चाहिए। पिछले छह महीनों में लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टरों का फैक्टरियों का इंस्पेक्शन न करना इस हादसे का एक कारण है। इस अस्पताल में भर्ती सभी लोगों को सबसे अच्छे स्टैंडर्ड का मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाना चाहिए, और उन्हें बचाने और उनकी सुरक्षा के लिए हर मुमकिन कोशिश की जानी चाहिए।
सीपीआईएम नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय ने जो मुआवजा बताया है, वह बहुत कम है। 2 लाख रुपये का मुआवज़ा काफी नहीं है, इसलिए, इस रकम को बढ़ाया जाना चाहिए। फैक्टरी मालिकों को मरने वालों के परिवारों को ज़्यादा मुआवजा देना चाहिए और सरकार को यह पक्का करने के लिए कदम उठाने चाहिए कि ऐसा मुआवज़ा दिया जाए।