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BRICS meeting: भारत में ब्रिक्स की मीटिंग होने के क्या हैं मायने, ईरान और इंडिया पर इससे क्या असर पड़ेगा ?

BRICS and ISR Nizami India visit: ईरान की अमेरिका के साथ जंग और शांति समझौते के बाद सुरक्षा उपायों के मददेनजर भारत में ब्रिक्स की मीटिंग और ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव महामहिम गदीर निजामी का भारत दौरा बहुत अहम है।

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भारत

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MI Zahir

Jun 22, 2026

BRICS Meeting News

ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में शिरकत करने के लिए ईरानी सुरक्षा प्रतिनिधि गदीर निजामी दिल्ली पहुंचे। (फोटो :X/ @ Iran_in_India)

BRICS National Security Advisors Meeting: दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के देशों के समूह ब्रिक्स की नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर्स की 22-23 जून को दिल्ली में मीटिंग हो रही है। इस मीटिंग का मकसद पश्चिमी देशों का दबदबा संतुलित करना और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज मजबूत करना है। ईरान के लिए यह मंच अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बनाने का एक जरिया है, जबकि भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों के लिहाज से एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है।

सुरक्षा और आर्थिक नीतियों में समन्वय की कोशिश

पिछली बार ईरानी नौसेना के जहाज भारत से लौट रहे थे तो अमेरिकी सेना ने उस पर हमला किया था। भारत और ईरान के बीच सामरिक, राजनयिक और बहुत अच्छे सांस्कृतिक संबंध भी हैं। ईरान अमेरिका जंग के समय ये रिश्ते कुछ प्रभावित हुए थे। अब भारत और ईरान वैश्विक दक्षिण की मांगों को बढ़ाने के लिए सुरक्षा और आर्थिक नीतियों में समन्वय स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

बैठक के लिए ईरानी सुरक्षा प्रतिनिधि निजामी दिल्ली पहुंचे

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव ग़दीर निज़ामी 22-23 जून को होने वाली ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए सोमवार को राजधानी पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान, उनसे भाग लेने वाले देशों के संबंधित अधिकारियों के साथ सुरक्षा मुद्दों और बहुपक्षीय सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए बैठकें करने की उम्मीद है।

ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव महामहिम निजामी दिल्ली पहुंचे

भारत में ईरानी दूतावास ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव महामहिम गदीर निजामी 22 जून, सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे। वे ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक में भाग लेंगे। अपनी यात्रा के दौरान, उनसे कई विशेष सत्रों में भाग लेने और भाग लेने वाले देशों के संबंधित अधिकारियों के साथ सुरक्षा मुद्दों और बहुपक्षीय सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए बैठकें करने की उम्मीद है।'

गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां' विषय पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे

भारत 22-23 जून 2026 को ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को बताया कि बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक के दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार व प्रतिनिधिमंडल प्रमुख 'आज दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां' विषय पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। वे राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के तेजी से बदलते स्वरूप के साथ-साथ उभरते सुरक्षा खतरों में नई प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर चर्चा करेंगे।'

भारत 2026 में चौथी बार कर रहा ब्रिक्स की अध्यक्षता

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, इससे पहले वह 2012, 2016 और 2021 में भी इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" विषय द्वारा निर्देशित है, जो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2025 रियो शिखर सम्मेलन में व्यक्त किए गए जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाता है।

ग्यारह प्रमुख उभरते बाजारों और विकासशील देशों का समूह है ब्रिक्स

ब्रिक्स विश्व के ग्यारह प्रमुख उभरते बाजारों और विकासशील देशों को एक साथ लाता है: ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। यह वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के समकालीन मुद्दों और वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक शासन से संबंधित मुद्दों पर परामर्श और सहयोग के लिए एक उपयोगी मंच के रूप में कार्य करता है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई भी है ब्रिक्स का एक मकसद

आधिकारिक वेबसाइट ने बताया, 'BRICS सहयोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय स्थिति, दूरसंचार, कृषि, श्रम और रोजगार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना, व्यापार और WTO सहित वैश्विक मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला में अपना दायरा बढ़ा रहा है।'

आखिर ​ब्रिक्स नाम कैसे पड़ गया

दरअसल यह संक्षिप्त नाम ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के लिए है। संगठन को शुरुआत में ब्रिक्स कहा जाता था -जब ब्राजील, रूस, भारत और चीन - जब इसके विदेश मंत्रियों ने 2006 में बैठकें शुरू कीं और 2009 में इसका पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया, तब दक्षिण अफ्रीका के 2010 में शामिल होने के बाद यह ​ब्रिक्स बन गया।

पिछले साल ब्राजील ने की थी ब्रिक्स बैठक की मेजबानी

जोहान्सबर्ग में 2023 के शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्यता को मंजूरी मिलने के बाद इंडोनेशिया जनवरी 2025 में इस समूह में शामिल हुआ। यह समूह प्राथमिकताओं का निर्धारण करता है और वार्षिक शिखर सम्मेलन में चर्चा करता है, जिसकी मेजबानी सदस्य बारी-बारी से करते हैं। पिछले साल ब्राजील ने ब्रिक्स बैठक की मेजबानी की थी और 2024 में रूस ने वार्षिक बैठक की मेजबानी की थी। इस साल भारत की मेजबानी की बारीआई है। (इनपुट:ANI)

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